गुलामी की जंजीरों में जकड़ा यूपी का गांव "नयापुरवा"

9 Aug 2018 4:12 AM GMT

15 अगस्त यानी आज़ादी का भ्रम की साल गिरह, अगले हफ्ते ही 15 अगस्त का दिन आ रहा है, आम हिन्दोस्तानियों में अभी से धूम है लोगो को लगता है कि वे 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हो गये थे, लेकिन यह सिर्फ उनका भ्रम है, सच यह है कि आज़ाद हुई थी सिर्फ खादी और वर्दी, बाकी हिन्दोस्तानी तो ज्यों के त्यों गुलाम ही हैं।

15 अगस्त 1947 को एक बदलाव ज़रूर हुआ, वह यह कि 1947 से पहले हम विदेशियों के गुलाम थे और 15 अगस्त 1947 के बाद से देसियों के गुलाम हैं।

यह हम बेवजह नहीं कह रहे बल्कि देश के अन्न दाताओं के जो हालात हम आपको दिखा रहे है वो हमारी बात को साबित करने के लिए काफी है।

ये जो तस्वीरे आप देख रहे हैं वो यूपी के लखीमपुर खीरी ज़िले की तहसील पलिया कलां के गांव नयापुरवा की है, देश की बागडोर देसियों के हाथों में आये सत्तर साल का लम्बा अरसा गुजर जाने के बावजूद नयापुरवा की हालत सुधरने के बजाये बद से बत्तर हो गयी है।

शारदा नहीं के किनारे बसा यह गांव हर साल शारदा के कहर का शिकार बनता है, गांव के लोग आजतक नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हैं।

इस गांव के लोगो को नही पता कि पक्की छत कैसी होती है, ना इनके पास खेती है ना कोई कारोबार, मेहनत मजदूरी पर ही निर्भर है यहां के बाशिन्दों की जिन्दगियां।

देखिये आजादी के भ्रम मे जी रहे नयापुरवा गांव के लोगों की पीड़ा सन्दीप शर्मा के साथ ........

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