शरीयत में बदलाव की मांग करने वाले इस्लाम से खारिज हैं

2017-08-28 08:40:14.0

तीन तलाक के नाम पर बीजेपी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं की हिमायत का जमकर कर ढोंग किया, बड़े पैमाने पर बहसें छिड़ गयीं जहां मुस्लिम विरोधियों ने मोदी सरकार के इस शिगूफे की सराहना की तो वहीं बड़ी तादाद में मुखालफत भी हुई। गैर मुस्लिमों के अलावा कुछ नाम के मुस्लिमों या यह कहा जाये कि इस्लाम की आस्तीन के सांपों ने मोदी सरकार के इस शिगूफे को सही भी ठहराया, लेकिन मजबूत इमान वालों ने शुरू से ही इसे नकारा, मुसलमान होने का ढोंग करने वाली कुछ औरतों और घरानों ने इस्लाम के कानून में फेरबदल के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हिसाब से फेसला दे दिया।
दरअसल बीजेपी सरकार को ना किसी महिला से हमदर्दी है ना किसी के भले के लिए तलाक का फसाद छेड़ा, बीजेपी ने सिर्फ ओर सिर्फ तीन तलाक नाम को एक शिगुफा छोड़ा है मुसलमानों को आपस में ही लड़ाने के लिए।
यहां हम ना तो सुप्रीम कोट्र को गलत ठहरा रहे है और ना ही बीजेपी, या दूसरे मुस्लिम विरोधियों को। हम बात कर रहे है उन लोगों की जिनके नाम और हुलिये से मुसलमान लगते है और खुद को मुसलमान कहलाते भी है। साथ ही हम सभी फिरकों के उन धर्म गुरूओं की जो बात बात पर लोगों पर फतवे लगाते है लेकिन अब जबकि शरियत में बदलाव का मुतालबा लेकर सड़क से अदालत तक कुछ मुस्लिम आवाज उठाने लगे तो किसी भी मरकज ने उनके खिलाफ फतवा नही दिया, जबकि अगर कोई मुस्लिम फिल्म एक्टर आरती करने को रोल करता है तो उसके खिलाफ कुछ घण्टों में ही फतवा दे दिया जाता है लेकिन जहां शरियत में बदलाव की कोशिश की गयी उनके खिलाफ कोई मुफ्ती नहीं जागा।
इसी को लेकर हमने मौलबियों के साथ ही आम मुस्लिमों से बात की जोकि हम आपको दिखा रहे है।
तीन तलाक के नाम पर बीजेपी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं की हिमायत का जमकर कर ढोंग किया, बड़े पैमाने पर बहसें छिड़ गयीं जहां मुस्लिम विरोधियों ने मोदी सरकार के इस शिगूफे की सराहना की तो वहीं बड़ी तादाद में मुखालफत भी हुई। गैर मुस्लिमों के अलावा कुछ नाम के मुस्लिमों या यह कहा जाये कि इस्लाम की आस्तीन के सांपों ने मोदी सरकार के इस शिगूफे को सही भी ठहराया, लेकिन मजबूत इमान वालों ने शुरू से ही इसे नकारा, मुसलमान होने का ढोंग करने वाली कुछ औरतों और घरानों ने इस्लाम के कानून में फेरबदल के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हिसाब से फेसला दे दिया।
दरअसल बीजेपी सरकार को ना किसी महिला से हमदर्दी है ना किसी के भले के लिए तलाक का फसाद छेड़ा, बीजेपी ने सिर्फ ओर सिर्फ तीन तलाक नाम को एक शिगुफा छोड़ा है मुसलमानों को आपस में ही लड़ाने के लिए।
यहां हम ना तो सुप्रीम कोट्र को गलत ठहरा रहे है और ना ही बीजेपी, या दूसरे मुस्लिम विरोधियों को। हम बात कर रहे है उन लोगों की जिनके नाम और हुलिये से मुसलमान लगते है और खुद को मुसलमान कहलाते भी है। साथ ही हम सभी फिरकों के उन धर्म गुरूओं की जो बात बात पर लोगों पर फतवे लगाते है लेकिन अब जबकि शरियत में बदलाव का मुतालबा लेकर सड़क से अदालत तक कुछ मुस्लिम आवाज उठाने लगे तो किसी भी मरकज ने उनके खिलाफ फतवा नही दिया, जबकि अगर कोई मुस्लिम फिल्म एक्टर आरती करने को रोल करता है तो उसके खिलाफ कुछ घण्टों में ही फतवा दे दिया जाता है लेकिन जहां शरियत में बदलाव की कोशिश की गयी उनके खिलाफ कोई मुफ्ती नहीं जागा।
इसी को लेकर हमने मौलबियों के साथ ही आम मुस्लिमों से बात की जोकि हम आपको दिखा रहे है।

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