शान से मनी जुलूस मोहम्मदी की 36वीं सालगिरह

2017-12-02 13:30:37.0

ईद मीलादुन्नबी मुस्लिमों का सबसे बड़ा त्योहार है। आज भी जुलूसे मोहम्मदी की 36वीं साल गिरह भी बड़े जोशो खरोश से मनाई गयी, इस दिन नियाज नजर के साथ ही गुजरे 37 साल से जुलूस भी निकाले जाते रहे है।
सबसे पहले आपको बतादें कि जुलूसे मोहम्मदी की शुरूआत कब और कहां से हुई। वैसे तो नबीए करीम की आमद से एक हजार साल पहले एक यहूदी बादशाह ने मदीने में जुलूसे मोहम्मदी निकालकर अपनी अकीदत का इज़हार किया था।
हिन्दोस्तान के साथ ही पाकिस्तान और दूसरे देशों में आज जो जुलूस निकाला जाता है इसकी शुरूआत बरेली जिले की आवलां तहसील के कस्बा सिरौली के मोहल्ला प्यास के मदरसा गुलिस्ताने शाहजी से हुई। हिन्दोस्तान में महकमये सेहत के मुलाजिम मुनव्वर अली उर्फ डा0 सिददीकी और हाफिज नजीर अहमद शेरी साहब ने सबसे पहला जुलूस 10 फरवरी 1980 को मदरसा गुलिस्ताने शाहजी से शुरू किया था, इसके बाद 1981 में बरेली शहर और इसके बाद से पूरे हिन्दोस्तान पाकिस्तान के साथ ही बहूत से देशों में निकाला जाना लगा।
हालांकि गुजरे दो तीन साल से कुछ लोग ना जाने किस किसको जुलूस का बानी बताने लगे है।
आज भी सिरोली में पूरी शानों शौकत के साथ जुलूस निकाला गया। बरेली में भी जुलूस निकाला गया, शाहजहांपुर के बण्डा में जुलूस का नजारा।
आज बरेली में थाना किला के दूल्हा मियां की मजार पर जुलूस के दौरान कुछ पुलिस वालों ने खुलेआम वर्दीगर्दी दिखाई। जहां जुलूस के दौरान एम्बूलैंस तक को रोका गया वहीं एक निजि वाहन में सवार कुछ वर्दी वालों ने जुलूस को रोककर अपनी गाड़ी निकाली, गाड़ी निकालने की कोशिश में लगे सिपाही ने जुलूस में शामिल लोगो पर वर्दी को रौब भी गांठा।

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