मदरसे के खिलाफ एक और नाकाम साज़िश

10 Aug 2019 12:30 AM GMT

गुजरी 30 जुलाई 2019 को बिजनौर जिले के नगीना के मोहल्ला बिश्नोई सराय रेती में जोरदार धमाका हुआ जिसे मुस्लिम दुश्मनों ने मदरसे की छत पर धमाका होना बताकर वायरल कर दिया।

एक पालतु चैनल ने अपनी फर्जी खबर में बारूद के ढेर पर मदरसा कहा।

वहीं नगीना के एक खुराफाती सतीश चैहान ने तो अपनी फेसबुक पर मस्जिद के नीचे तैखाना तक होना बता दिया साथ ही इसने मदरसे में असलाह बनने का दावा भी कर दिया था। लेकिन बलवाईये को सरकार की पुश्तपनाही की वजह से इसकी तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं जुटा सका प्रशासन। जबकि यही हरकत अगर किसी मुस्लिम ने की होती तब पुलिस उसको पाताल से खोज लाती है।

अफवाह वायरल होते ही सीओ महेश कुमार समेत बहुत से अफसरान मस्जिद मदरसे की तलाशी कर धमाके के सुराग तलाश करने लगे, लेकिन घण्टो तक बारीकी से तलाश करने पर भी मस्जिद मदरसे से दीपावली में छोटे बच्चों वाला का पटाका भी बरामद नही हुआ।

आपको बता दें जब धमाके की आवाज सभी लोगो ने सुनी है और मस्जिद मदरसे की तलाशी लेने पर कुछ नही मिला तो उस ही वक्त पुलिस ने मदरसे के आसपास के घर की तलाशी नही ली, क्योंकि योगीराज के चलते कोई भी अफसर कानून से वफादारी करके अपनी कुर्सी खतरे में डालना नहीं चाहता।

क्या धमाका सिर्फ मस्जिद मदरसों में ही हो सकता है आसपास के किसी घर मे नही हो सकता है और जब सब लोग चिल्ला चिल्ला के बोल रहे है कि धमाका हुआ है।

सिर्फ मस्जिद मदरसे को ही साजिश का शिकार बनाया जा रहा है। क्या मदरसे के आस पास के घरों मे धमाका नही हो सकता था और जब मदरसे से कुछ बरामद नही हुआ तो बिना वजह तीन लोगों को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में क्यो लिया जबकी अफवाह फैलाने वाले सतीश को पुलिस ने खुलेआम अभयदान दे दिया।

नूर ऑप्टिकल्स के मालिक मुजम्मिल अजीम ने जब सोशल साइट पर अफवा उड़ाने वाले सतीश से अफवा उड़ाने की वजह पूछी तो उसने पुलिस को तीन घण्टे लेट आने दोष दिया और मदरसे वालो पर तीन घण्टे में सबूत मिटाने का इल्जाम रख दिया। आपने सुना कि किस तरह यह खुराफाती तयखाना तयखाना ही रट रहा है

लेकिन बात यहीं खत्म नही होती क्यो की एलआईयू सक्रिय हो गई और एटीएस भी मदरसे पर निगाहें बनाये हुई थी और तीन दिन बाद डॉग स्कवॉयड को भी बुलाया गया पुलिस टीमों ने मदरसे का कोना कोना छान दिया पर कही कोई सुराग नही मिला जिससे विस्पोट होने की जानकारी पुख्ता हो सके मदरसे की छत से लेकर हर जगह बारीकी से पड़ताल की पर कही भी विस्फोट का एक कण भी या निशान हाथ नही लगा।

तमाम पड़ताल और माथापच्ची के बाद जो बात सामने आई वो चैकाने थी जानकारी लगी कि मदरसे के पास किसी वाहन का टायर फटा था टायर फटने के बाद ड्राईवर वाहन को लेकर वहाँ से चला गया था और वही नगीना सीओ से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि धमाका किसी पटाखे का भी हो सकता है।

क्या सच मे पटाखे और टायर का धमाका इतनी तेज आवाज का हो सकता है कि पूरे मौहल्ले वाले अपने घरों से बाहर आ जायें और मदरसे के पास के स्कूल के बच्चे धमाके से रोने लग जाए।

खैर तीन दिन बाद डॉग स्कवॉयड और पुलिस टीमों ने मदरसे और मौहल्ले के कुछ घरों का कोना कोना छान कर देख लिया कही कोई सुराग नही मिला और पुलिस को इस बात की पुष्टि अच्छे से हो गई कि धमाके से मस्जिद, मदरसे का कोई लेना देना नही ये सब मालूम होने पर पुलिस ने मदरसे की जाँच का चैप्टर बन्द कर दिया।

सवाल यह पैदा होता है कि धमाके की खबर पर दौड़ी पुलिस ने उसी वक्त डागस्काॅयड का इस्तेमाल क्यों नहीं किया ?

आसपास के सभी घरों की तलाशी उसी वक्त क्यों नहीं ली गई ?

मोके पर कुछ ना मिलने पर भी तीन लोगों को क्यों हिरासत में लिया गया ?

अफवाह फैलाने वाले के खिलाफ मामला क्यों नहीं लिखा गया ?

फर्जी खबर चलाकर माहोल बिगाड़ने वाले चैनल के खिलाफ कोई कदम कयों नहीं उठाया जा रहा है ?

पुलिस ने इतनी आसानी और जल्दी जांच क्यों बन्द करदी, जबकि धमाके की आवाज सैकड़ों लोगों ने सुनी और पुलिस को बताया भी ?

  Similar Posts

Share it
Top