आखिर हद होती है बेशर्मी की

2017-10-27 16:11:41.0

आखिर हद होती है बेशर्मी की

दिल्ली/बनारस- हर बात की एक हद होती है चाहे वह अच्छी हो या बुरी। लेकिन "आगे बढ़ रहे मेरे देश" में "मेरे भारत की महानता यह है" कि यहां मुर्दों को जेल में सड़ाया जा सकता है, मुर्दो से मुख्यमंत्री अपने आवास पर मिल सकते हैं, मुर्दे चुनाव लड़ सकते है, यानी कुछ भी हो सकता है लेकिन अगर कुछ नहीं हो सकता तो बस न्याय।
उत्तर प्रदेश के बनारस के रहने वाले संतोष मूरत सिंह को सरकारी मशीनरी ने मोटी रिश्वत लेकर मुर्दा दर्शाकर उसकी जायदाद लुटादी। रंगबिरंगे मुख्यमंत्री आये चले गये यहां तककि देश को आगे बढ़ता बताने वाले पीएम ने अपने भारत प्रवासों के दौरान इस मुर्दे को धरना पर बैठे देखा लेकिन 56 इंच को सीना इस को न्याय दिलाने के नाम पर सिकुड़कर गायब हो जाता है।
सन्तोष मूरत सिंह गुजरे पांच साल से खामोशी के साथ दिल्ली जंतर मंतर पर जिन्दा दिखने की कोशिश में धरने पर है।
गुजरे हफ्ते न्यायधिकरण के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने आन्दोलन कर्ताओं को जंतर मंतर से खदेड़ना शुरू कर दिया, इसी कड़ी में आज शाम सन्तोष को भी कहीं और जाकर धरना देने का नोटिस थमा दिया गया।
सन्तोष के मामले को देखने के बाद तो यही कहा जा सकता है कि हमारे देश की सरकारों और सरकारी मशीनरी ने बेशर्मी की सारी हदें पार करदी है।

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