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लेखपाल चोर तो अफसर चोरों के सरदार - ठाकुरदास

12 Feb 2020 10:45 AM GMT

लेखपाल चोर है तो यहां बैठे अफसरान चोरों के सरदार हैं,

यह कहना है यूपी के बरेली ज़िले के गांव परादासपुर के एक ग़रीब मज़दूर गुलाम किसान ठाकुरदास का,

आज़ाद देश के भ्रम मे जीने वाले हिन्दोस्तानियों में ही से एक ठाकुरदास नाम का यह गुलाम चन्द रूपयों के लिए दफ्तरों की इतनी ठोकरें खा चुकने के बाद उसको सरकारी मशीनरी की हकीकत को समझ गया और आज मीडिया के सामने फूट पड़ा,

दरअसल बरेली के परादासपुर गांव का ठाकुरदास किसान सम्मान योजना के दायरे में आता है, और इसे पात्र मानकर लाभ मिलने के सपने भी दिखा दिये गये,

लेकिन लेखपाल ने अपनी खाऊ आदत के चलते ठाकुरदास का बैंक अकाउण्ट नम्बर गलत दर्ज कर दिया,

भुक्तभोगी ठाकुरदास तब से ही बैंक खाता नम्बर ठीक कराने के लिए ब्लाक से लेकर कलक्टर तक के दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर थक चुका है,

हद तो यहां तक पहुंच गई है कि अब गरीब ठाकुरदास को डीएम और सीडीओ के सामने पहुंचने से रोका जाने लगा

याद दिलादें दो ही दिन पहले कलैक्टर नितिश कुमार ने कहा था कि

एक तरफ डीएम घर घर जाकर योजनाओं को चलाने की बात कर रहे है तो दूसरी तरफ उनके मा तहत गरीब गुलाम जनता का खून निचाड़ने मे लगे हैं,

सिर्फ बैंक खाता नम्बर ठीक कराने जैसे मामूली से काम के लिए ब्लाक से लेकर कलैक्ट्रेट तक की ठोकरें खा खाकर ठाकुरदास को सरकारी मशीनरी की हकीकत समझ आ गई और उसने एवीएन से बात करते हुए कहा कि लेखपाल चोर है और यहां बैठे अफसरान चोरो के सरदार है

इस मामले को सुनने के बाद कम से प्रधानमंत्री मोदी के "मेरा भारत बदल रहा है" जैसे जुमले का साकार रूप सामने आ गया,

जब सिर्फ खाता नम्बर ठीक कराने के लिए एक गरीब किसान को अपने बच्चों का निवाला तक बेचकर कलैक्ट्रेट पहुंचने का किराया भाड़ा जुटाना पड़ा

विकास का इससे बड़ा और कोई सबूत हो ही नहीं सकता,

मंचों पर बड़ी बड़ी डींगे मारने वालों के लिए गर्व की बात है कि उनकी सरकारों में गुलाम जनता कि अपने परिवार का निवाला तक बेचना पड़े

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