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क्रान्तिकारी शहीदों के निशानों को मिटाने की कोशिशें

27 Jan 2020 12:38 PM GMT

नेताओं के जन्म दिन मरन दिन मनाने की होड़ में अपनी जानों की कुर्बानियां देकर देश को ब्रिटिश चुंगल से आजाद कराने वाले क्रान्ति कारी शहीदों को याद को पूरी तरह मिटाया जा रहा है,

जबकि ब्रिटिशों के मुखबिरों, देश को नोच नोचकर खोखला करने वालों के जनम दिन मरन दिन को आगे आगे रखा जा रहा है,

कोई किसी शहर के नाम को बदल कर नेता के नाम पर करने मे लगा है तो कोई विरासतों को अपने चहेतों के नाम पर करने पर उतरा नजर आ रहा है,

कुर्बानियां देकर देश को अंग्रेजो से आजाद कराने वाले वीरों की कबरें और समाधियां तक मिटने की कगार पर हैं

इसी कड़ी में रोहेला सिपह सालार नज्जू खां और बुलन्द खां का नाम भी है

यूपी के बरेली जिले के कस्बा फतेहगंज पश्चिमी के पूरब में आजादी के दोनों दीवानों और उनके साथियों की कबरें मौजूद हैं, टीले नुमा जमीन पर आजादी के इन परवानों की कबरें वतन परस्ती का जीता जागता सबूत हैं,

आज से लगभग 212 साल पहले यानी 1794 में अंग्रेजों को मजबूत टक्कर दी, अंग्रेज फौज को वहां से भागना पड़ा था,

अंग्रेजों को मार भगाने के बाद नज्जू खां और बुलन्द खां अपने साथी फोजियों के साथ जीत का जश्न मना रहे थे कि अंग्रेजों ने धोके से हमला कर दिया, निहत्थे होने के बावजूद नज्जू खां बुलन्द खां और उनके साथियों ने ब्रिटिश फौज के 14 अफसरों समेत 614 फौजियों को मौत के घाट उतार दिया,

लेकिन बारूद खत्म हो जाने की वजह से सीनों पर गोलियां रोककर शहादत को गले लगा लिया

आजादी के इन मतवालों को यहीं दफ्न किया गया,

जंग का यह मैदान 587 बीघा जमीन पर था, जिसमें रोहेला फौजियों के अलावा ब्रिटिशो को भी दफ्न किया गया,

अफसोस ही नहीं बल्कि बेहद शर्म की बात यह है कि देश को अंग्रेजों के चुंगल से आजाद कराने के लिए जाने कुर्बान करने वाले शहीदों की किसी को याद नहीं रही, खासतौर पर मुस्लिम शहीदों के नामो निशान ही मिटाने की कोशिशे शुरू से ही की जाती रही हैं,

शर्म की बात यह है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के मौकों पर करोड़ो रूपये उड़ाकर जश्न मनाकर अपने अपने नेताओं के गुणगान किये जाते रहे हैं लेकिन वतन पर मिटने वालों के नाम लेना पसन्द नहीं है,

सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि 1947 से आज तक प्रधान मंत्री से लेकर टाऊन एरिया के चेयरमैनों तक ने कभी ना यहां झण्डा फहराया ना ही अकीदत और अहसान मन्दी के दो फूल ही अर्पित किये,

टाउन एरिया पंचायत की बेशर्मी का हाल तो यह है कि देश के इतिहास की इन धरोहरों की साफ सफाई तक नहीं की जाती,

इसी 26 जनवरी को हमारी टीम ने इस धरोहर का मुआयना किया, तब पाया कि अपनी जानो की कुर्बानियां देकर देश को 26 जनवरी और 15 अगस्त की खुशियां देने वालों की निशानियों की निशानियों की सफाई तक नही कराई गई थी,

हमने इस बाबत चेयरमैन से बात करना चाही तो चेयरमैन ने मिलना पसन्द नही किया,

इसके बाद हमने सभासद डा० मोईन उददीन अंसारी से मुलाकात करके इस बाबत बात की, तब उन्होंने टाऊन एरिया पंचायत की इस लापरवाही को कबूल किया और अफसोस जताया

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