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CAA विरोध पर सड़कों पर ना उतरें मुसलमान - इमरान नियाज़ी

19 Dec 2019 4:40 PM GMT

CAA विरोध पर सड़कों पर ना उतरें मुसलमान - इमरान नियाज़ी

आरएसएस कमाण्ड वाली बीजेपी सरकार शुरू से ही मुस्लिम मुक्त भारत के अपने एजेंण्डे को कामयाब करने के लिए काम करती आ रही है। लगातार कोशिशें की जा रही हैं कि किसी तरह से मुसलमान पूरी तरह से तितर बितर होकर खत्म हो। अपने इसी एजेण्डे पर काम करते हुए सरकार ने तीन तलाक एक्ट लाकर मुस्लिम परिवारों को बखेरकर तबाह करने की चाल चली, लेकिन यह फार्मूला पूरी तरह फेल हो गया, क्योंकि इक्का दुक्का आज़ाद मिज़ाज महिलाओं को छोड़कर आम मुस्लिमों ने सरकार के तीन तलाक एक्ट को पूरी तरह नकार दिया, ऐसा भी नहीं कि कानून बनने के बाद मुस्लिम परिवारों में विवाद नहीं हो रहे, खूब हो रहे हैं लेकिन अब मामले पुलिस या अदालतों में ना जाकर शरई अदालतों में तय होने लगे है। तीन तलाक के नाम पर सरकार पूरी तरह फेल हो गई। तीन तलाक में नाकामी के बाद सरकार ने NRC को मैदान में उतारा, एनआरसी असम में शुरू की गई तो वहां सरकार को मुंह की खानी पड़ी, चले थे मुसलमानों को घुसपैठिया घोषित करने लेकिन यहां तो मुसलमानों से चैगुनी तादाद खुद बीजेपी वोटरों की ही सामने आ गई, यह हालात देखकर एनआरसी को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। दोनों बार मुस्लिम मुक्त भारत बनाने का सपना सिर्फ सपना ही बनकर रह जाने के बाद अब CAA (नागरिक्ता संशोधन अधिनियम) लाया गया। इस बार शुरू से ही एजेण्डा कामयाब होने लगा। जामिया पर पुलिस के साथ गुण्डों के झुण्ड से अटैक कराया गया (दर्जनों वीडियो और फोटो सबके सामने है) यूनीवर्सिटी की लाईब्रेरी, हौस्टल में अचानक हमला होने पर जवाबी कार्यवाही होना लाजमी था, हमले के जवाब में छात्रों ने भी पत्थर बाजी करके अपना बचाव किया। शायद यही चाहती भी है सरकार। जवाबी कार्यवाही को हिंसा का नाम देकर यूनीवर्सिटी ही नहीं बल्कि पूरे जामिया इलाके में मुसलमानों को आतंकित करने का सिलसिला शुरू हो गया। जामिया में हमला कराने की हड़बड़ाहट में सरकार भूल गयी कि जामिया में हजारों की तादाद में गेर मुस्लिम स्टूडेंट भी हैं, मुस्लिम छात्रों से ज्यादा गैर मुस्लिम छात्र चोटिल हुए। एक शिक्षण संस्थान पर की गयी बर्बरता के खिलाफ देश भर के दर्जनों यूनीवर्सियां और आईटीआई ने आवाज उठाई जिसमें बीएचयू (बनारस हिन्दू यूनीवर्सिटी) का जामिया की सपोर्ट में उतरना अपने में बड़े मायने रखता है सरकार ने शायद यह सपने भी नहीं सोचा होगा कि जामिया के लिए BHU भी आवाज उठा सकता है, लेकिन बीएचयू ने सीएए के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई बल्कि जामिया में की गई बर्बरता के खिलाफ खड़ा हुआ बीएचयू, इसपर सरकार के कदम लड़खड़ा गये क्योंकि Jamia, JNU, AMU जैसी हरकत बीएचयू में करने की हिम्मत नहीं है। सरकार की मन्शा भी यही है कि मुसलमान सड़कों पर उतरें फिर पुलिस अपना काम शुरू करे। यह साजिश एक बड़ी हद तक कामयाब होने लगी, मुसलमान कुछ नेताओं के बहकावे में आकर सड़कों पर आने लगे। मुसलमानों ने जामिया के वीडियों और फोटुओं से सबक नहीं लिया। हजारों की तादाद में मुसलमान जब सड़क पर आये तब इस भीड़ में कुछ गुण्डे भी टोपी लगाकर घुस गये ओर आगजनी, तोड़फोड़ जैसी हरकतें करके चुपके से गायब हो लिए, लखनऊ और बंगलेरू के हालात सबके सामने हैं। इस बार आरएसएस की बीजेपी सरकार अपने मकसद की तरफ बढ़ने लगी। याद कीजिये गुजरे दिनों ही सरकार ने रूल दिया कि किसी को भी शक के आधार पर आतंकी घोषित किया जा सकता है। आतंकी साबित करने के लिए पहले बलवाईया साबित करना जरूरी है इसलिए मुसलमानों के सामने ऐसे हालात पैदा कर दिये गये कि वे सड़क पर आकर हंगामे करें, मुसलमान इस चाल को समझने की कोशिश नहीं कर रहा सिर्फ नेताओं के उकसाने पर ही खड़ा हो रहा है। मुसलमानों को देखना होगा कि आज जो पार्टियां या उनके नेता आपको उकसाकर सड़क पर ला रहे है वे कल बिल पास होने के वक्त सदन से वाॅकआउट करके पिछले दरवाजे से बिल का समर्थन कर चुके हैं। ऐसे दोगले नेताओं के बहकावे में कतई ना आवें। याद रखिये सरकार इसे हिन्दू मुस्लिम बनाने की कोशिश में है हज़ारों भक्त और पालतू चैनलों, अखबारों के पत्तलकार ऐड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं मामले को हिन्दू मुस्लिम का रंग देने में साथ ही कुछेक आईपीएस आईएएस पीसीएच जैसे अफसर भी भक्तों की मदद में लगे हैं

हम यह बिल्कुल नहीं कह रहे कि आप एक्ट का विरोध ना करें, बिल्कुल और ज़रूर कीजिये लेकिन अपने विरोध से विरोधियों के मकसद को कामयाब मत काजिये। विरोध ऐसे कीजिये जिससे आपको सफलता मिले, नाकि साजिश कर्ताओं का मकसद पूरा हो। मेरा मानना है कि मुसलमान सड़क पर बिल्कुल भी ना उतरें बल्कि उससे अच्छा है कि असहयोग आन्दोलन शुरू करें। मुसलमान बिल वापिस होने तक के लिए हर तरह को गोश्त (मीट) खाना पूरी तरह छोड़दें, कम्पनियों एजेंसियों में मकेनिकल काम करने वाले मुसलमान अपने हाथ खींचलें, कन्ट्रैक्शन (राजगीरी) करने वाले कुछ दिन काम ना करें, सब्ज़ी मण्डियों में आढ़ते चलाने वाले आढ़तों को बन्द रखें, दूध का बड़ा कारोबार करने वाले काम बन्द करें, फर्नीचर के कारोबारी ओर कारपेन्टर अपने हाथ खड़े करलें, इसी तरह जो जो भी काम मुसलमानों के बलबूते चल रहे हैं सब असहयोग पर आ जायें। शान्ती से अपने घरों में बैठें। कोई किसी तरह के कागजात ना दिखाये। सड़क पर आन्दोलन प्रदर्शन करके विरोधियों की साजिश को किसी कीमत पर कामयाब ना होने दें। मेरी इस बात पर कुछ ना समझ लोग सवाल करेंगे कि काम बन्द करके हम खायेंगे कया ? उनके लिए सीधा सा जवाब है कि सड़क पर हंगामें करके लाठियां खाकर जेलों में सड़कर क्या खाओंगे ?

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