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लॉकडाउन / सोशलडिस्टैंसिंग का तरीका 1400 साल पहले ही इस्लाम ने बता दिया था

19 April 2020 8:40 PM GMT

कोरोना वायरस मतलब एक ख़तरनाक महामारी,

दुनिया का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ चुका है,

दुनिया भर को अपने आतंक से सताने वाला अमरीका इस अज़ाब की गिरफ्त में आकर घुटने टेक चुका है,

दुनिया भर के तमाम साइंटिस्ट, बड़े बड़े डाक्टर इसका इलाज तलाशने में रात दिन एक किये हुए हैं,

दुनिया भर ने इसकी रोकथाम के लिए सोशल डिस्टैंसिग और लॉकडाउन जैसे फार्मूले अपनाना शुरू कर दिये,

भारत में भी लॉकडाउन का फार्मूला अपनाया जा रहा है,

मज़हब, पार्टी, जगह का फर्क नहीं रहा सभी लॉकडाउन को तन मन धन से अपना रहे हैं,

हांलाकि देश के कुछ दुश्मनों और पालतू मीडिया ने कोरोना की वजह मुसलमानों और इस्लाम को साबित करने के लिए नंगा नाच शुरू कर दिया,

आईये हम बताते है कि लॉकडाउन और सोशल डिस्टैंसिंग का यह फार्मूला कोई अजूबा नहीं है,

दरअसल लगभग चौदह सौ साल पहले पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद उर रसूल अल्लाह ने लॉकडाउन और सोशल डिस्टैंसिग का रास्ता बताया था,

पूरे गौर से सुनिये फरमाने रसूल

अब एवीएन दुनिया भर के मुसलमानों के साथ ही हिन्दोस्तान के मुसलमानों को बताकर अपील करता है कि अगर लॉकडाउन के चलते घर में रहकर भूख से किसी की मौत होती है तो उसको गुस्ल भी दिया जायेगा, नमाज़े जनाज़ा भी होगी,अज़ीजों के कांधे भी मिलेगें,

लेकिन खुदा ना करे किसी की कोरोना से मौत होती है तो ना गुस्ल मिलेगा, ना नमाज़ मिलेगी ना कांधे मिलेंगे

इसलिए ध्यान रखिये घर में ही रहिये, राज़िक खुदा है, खाने का इन्तेज़ाम भी हो जायेगा

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