मोटी कमाई बचाने के लिए अमन को भेंट चढ़ा रहा है कोटेदार

28 Aug 2019 9:15 PM GMT

योगीराज के खौफ से अपनी मोटी कमाई का धंधा बचाने के लिए ड्रामे करने लगा कोटेदार।

ड्रामे की हद तो तब हो गई जब साबिर नामक कोटेदार ने अपने ही खानदान और समुदाय के खिलाफ दूसरे समुदाय को भड़काने की नियत से पुलिस में झूठी रिपोर्ट भी करदी।

दरअसल मामला यूपी के बरेली जिले के थाना देवरनियां के गांव दोहपरिया का है

गांव का साबिर नामक व्यक्ति सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान चलाता है मतलब गांव का कोटेदार है।

मामला दरअसल यह है कि दोपहरिया गांव का कोटा साबिर नामक मुस्लिम शख्स के नाम है।

और देश की दूसरी जगहों की तरह यूपी में भी योगीराज आने के बाद ही मुस्लिम विरोधियों ने दोपहरिया गांव में भी खुराफातें शुरू करदीं, इसी कड़ी में गांव के खुराफातियों ने साबिर का कोटा खत्म कराने की कोशिशें शुरू करदीं, साबिर मोटी कमाई हाथ से जाती देखकर घबरा गया और उसने विरोधियों को पटाने की कोशिश के तहत सावन के आखिरी सोमवार को हरिदूार से कांवड़ लाकर गांव के मन्दिर में जलाभिषेक किया, साबिर की इस चाल से विरोधी खुश हो गये और साबिर का कोटा बच गया।

चूंकि कांवड़ लाकर जलाभिषेक करने का काम उसने सिर्फ और सिर्फ अपनी मोटी कमाई बचाने के लिए किया तो चर्चाये होना लाजिमी थीं।

अगर यही काम साबिर ने सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए किया होता तब शायद भमोरा थाने के एसओ जावेद खान के साथ ही चारों तरफ इसकी तारीफ नजर आती।

चर्चाओ को सुनकर साबिर ने एक नया ड्रामा खड़ा करते हुए गांव में साम्प्रदायिक्ता का बीज बोने के लिए गांव के मुस्लिमों के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर कहा कि गांव के मुस्लिमों ने उसका सोशल बायकाट कर दिया है और गांव की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ने दी जा रही है।

साबिर की इस शिकायत के बाद हमने गांव जाकर सच्चाई मालूम की, तब मालूम हुआ कि गांव में कोई मस्जिद ही नहीं है,

गांववालों से बात करने पर बताया गया कि किसी ने इसका बायकाट नहीं किया और सबसे बड़ी बात यह कि यह नमाज पढ़ने जाता ही नहीं है।

सवाल यह पैदा होता है कि जब यह नमाज पढ़ने जाता ही नहीं तो रोका किसे गया?

दरअसल दोपहरिया गांव में लगभग बारह सौ की आबादी है जिसमे सिर्फ तीन सौ मुस्लिम है बाकी लगभग नौ सौ हिन्दू हैं,

बात साफ है कि राशन कार्ड धारकों की ज्यादा तादाद भी हिन्दुओं की ही होगी, मतलब कि साबिर की कमाई का ज्यादा हिस्सा भी हिन्दू परिवारों से ही आता है और साबिर अपनी मोटी कमाई मे कमी होना या बन्द होना पसन्द नही कर रहा है इसलिए वह मुस्लिम विरोधियों को खुश रखने का हर हथकण्डा अपना रहा है।

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