गुलाम जनता को उसके गुलाम होने का एहसास करा रहा है चुनाव आयोग

21 April 2019 8:41 PM GMT

समझना मुश्किल है कि देश के आला अफसरान कहां से इतना दिमाग लेकर आये हैं।

या यह कहे कि खददरधारियों को बचाव का रास्ता दिखाया जा रहा है।

हम बात कर रहे हैं चुनावी सीजन में जगह जगह ली जा रही गुलाम जनता की कारों की तलाशियों की, गुलाम हिन्दोस्तानियों को उनके गुलाम होने का एहसास कराये जाने का यह सिलसिला गुजरे 2014 के चुनाव से चल रहा है।

आयोग का कहना है कि चुनाव में खरीद फरोख्त रोकने के लिए किया जा रहा है, अच्छा कदम है, लेकिन सवाल यह है कि,

क्या जरूरी है कि वोटो की खरीद फरोख्त करने वाले कारों से ही रकम लेकर चलेगे,जिसे रकम लेकर चलना है वह बस, टैम्पो, बाइक, ट्रैक्टर ट्राली, साईकिल से भी चल सकता है, साथ ही कुछ सेवा करके पुलिस या किसी भी अफसर की सरकारी गाड़ी से भी रकम लाई ले जाई जा सकती है, वैसे भी पुलिस की तो किसी भी गाड़ी को चैक करने की हिम्मत कानून में नही है,

आयोग के इस कदम से जहां एक तरफ गुलाम जनता को गुलामी का एहसास कराया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ कारोबारियों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया जा रहा है

आईये देखते ऐसी ही एक चैकिंग हमारे यूपी हैड संदीप शर्मा के साथ

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