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पुलिस के सामने बौनी साबित होती अदालतें

31 May 2020 8:42 AM GMT

पुलिस के सामने अदालतों की हैसियत ही क्या है

जी हां,

सही सुना आपने,

पुलिस की मर्जी के आगे अदालतों की कोई वैल्यू नहीं रही,

अदालतें चाहे जितना चीखती रहें,

पुलिस वही करती है जिसमें पुलिस का फायदा होता है,

ये बात हम बेवजह ही नहीं कह रहे मान्यवर,

हम सबूत और दलील साथ लाए हैं,

दरअसल गुज़रे छ: साल के अर्से में यानी देश में मोदी सरकार बनने के साथ ही अदालतें बेबस और कमज़ोर साबित होती जा रही हैं, जिसके हज़ारों सबूत आपके सामने आ ही चुके हैं,

फिलहाल बरेली से ही एक सबूत देखिये,

बरेली के थाना बारादरी की फाइक़ कालोनी का मामला है, ग़रीब की ज़मीन पर बिल्डर ने अवैध कब्ज़ा कर लिया, मामला कई अदालतों मे विचाराधीन है,

सिविल जज की अदालत नें फैसले तक के लिए सम्पत्ति पर यथा स्थिति बनाये रखने के आर्डर "स्टे आर्डर" किया हुआ है

लेकिन बिल्डर ने अदालत को दोबारा ठेंगा दिखाते हुए ज़मीन पर निर्माण शुरू कर दिया,

ज़मीन का मालिक थाने से आईजी डीआईजी तक के यहां चक्कर लगा चुका है लेकिन पैसे के दबाव मे पुलिस अदालत की अवमानना को रोकने को तैयार नहीं है,

मतलब साफ है अदालतों की पावर पुलिस और खददरधारियों के सामने बेबस और लाचार साबित हो रही है

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