चन्देरी का (दिल्ली) दरवाजे के शिलालेख की वास्तविकता

2017-02-12 13:13:50.0

चन्देरी का (दिल्ली) दरवाजे के शिलालेख की वास्तविकता

(हेमन्त यादव)
अशोकनगर- ऐतिहासिक नगरी चन्देरी का प्रमुख उत्तरमुखी दरवाजा जिसे दिल्ली दरवाजे के नाम से पहचाना जाता है। इस दरवाजे के ऊपर आर्च पर चार पंक्तियों का फारसी लेख उत्कीर्ण है। चन्देरी के कुछ बुजुर्ग कहते हैं कि इस पर लिखा है कि - "चन्देरी बेबफा है।" या कुछ कहते हैं कि लिखा है- "ज़मीं ज़रदार नहीं, वृक्ष फलदार नहीं। आदमी दिलदार नहीं, औरत बिन यार नहीं।। चन्देरी बेबफा।" यह भ्रांति समाप्त करने के लिए यह मेरा प्रयास है कि इस दरवाजे पर ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है। इस चार पंक्तियों के फारसी शिलालेख की वास्तविकता यह है।
1- पहली पंक्ति में बिसमिल्लाह और द्वार की भव्यता तथा इसे निर्मित करने का शाही आदेश का उल्लेख है।
2- दूसरी पंक्ति में दिलावर खां गौरी को फारसी इतिहास का महान बादशाह, योद्धा, रुस्तम आदि गुणों का प्रशस्ति पूर्ण वर्णन किया गया है।
3- तीसरी पंक्ति में ईश्वर से गौरी के लिए प्रार्थना और न्यायप्रिय, मानवता के लिए समर्पित बताया गया है।
4- अंतिम पंक्ति में, जुनैद पुत्र जैद के नाम के साथ तारीख 25 जमादि-उल-अव्वल, हिजरी 814 अर्थात् 25 सितम्बर 1411 ई0 तिथि अंकित है। अर्थात् यह दरवाजा 25 सितम्बर 1411 ई0 में बनकर तैयार हुआ। यह दिलावर खां गौरी की प्रशस्ति है। जो संभवतः उसकी मृत्यु के बाद उसके पुत्र होशंगशाह ने उत्कीर्ण कराई होगी। क्योंकि ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर दिलावर खां गौरी की मृत्यु 1406 ई0 में हो चुकी थी। इस पोस्ट को इतना शेयर करो कि कल कोई यह न कह पाये कि इस पर चन्देरी बेबफा लिखा है।

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