इधर आरती उधर अज़ान

25 April 2017 6:25 AM GMT

इधर आरती उधर अज़ान

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मंदिर-मस्जिद दे रहे भाई चारे का पैगाम

पिपरई/अशोकनगर (हेमन्त यादव) इन दिनों हमारे देश में एक ट्रेंड सा बना हुआ है, अगर किसी को मशहूर होना हो या फिर किसी को विवादो में आना है, तो वह किसी भी धर्म पर टिप्पणी करके फालतू की पब्लिसिटी स्टंट के जरिये से विवादो में आ सकता है। ऐसा ही सहारा लिया है, बालीवुड के जाने-माने गायक सोनू निगम ने सुबह सबेरे होने वाली अजान पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईश्वर सभी पर कृपा करे में मुसलमान नही हूं और मुझे रोज अजान की आवाज सुनकर जागना पड़ता है। भारत में कब यह जबरन धार्मिकता खत्म होगी। पिपरई नगर में स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर व जामा मस्जिद, दोनों की दीवार एक ही है। मंदिर और मस्जिद की दीवार एक होने के कारण उनके मानने वालों को कभी कोई परेशानी नही आई। मस्जिद में अपने समय पर अजान होती है तो मंदिर में भी समय पर आरती होती है। यह मिसाल है, सोनू निगम जैसे उन नफरत की आग फैलाने वाले उन मजहबी गुण्डों के लिए जो बात-बात पर धर्म के नाम पर वे वुनियादी बातों से गुमराह कर कें दंगा फसाद को बड़ावा देते है। जहां एक तरफ मस्जिद में नमाज अता होती है तो दूसरी और भगवान की आरती के जयकारों गूंजते हैं। यहां आज तक पूजा और इबादत के नाम पर कोई भी फसाद किसी भी धर्म के लोगों ने नहीं किया है। इन दोनों इबादत स्थलों में प्रतिदिन पूजा अर्चना और नमाज अदा की जाती है। गौर तलब है कि यहां आरती होती रहती है, और अजान चलती रहती है। लेकिन कोई भी धर्मावलंबी इसे अपनी इबादत में दखल नहीं मानता है। नगर में स्थित यह मंदिर-मस्जिद साम्प्रदायिक एकता की शानदार मिसाल हैं। यहां एक तरफ आरती की मधुर स्वर लहरी गूंजती है तो दूसरी तरफ अजान की पाकीजा सदा। मगर आज तक कभी ऐसा मौका नहीं आया जब अजान और आरती के आस्थावानों के बीच कभी विवाद हुआ हो। देखिए हिन्दुस्तान एक ऐसी जगह है, जहां हर इंसान की सुबह मंदिर की घण्टी और अजान के साथ होती है। हम हिंदुस्तानी इसके बिना अधूरे है। हम सब बचपन से ही इसी महौल में बड़े हुए है, घर के पास में हो रही राम कथा हो या मस्जिद में तकरीर हम सभी समुदाय के लोग इस कार्य में बड़ चढ़ कर हिस्सा लेते आ रहे है। क्योंकि यही हमारे देश की गंगा जमुनी तहजीब की संस्कृति है।


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