खुलेआम लिखी जाती हैं सट्टे की पर्चियां

2017-01-23 13:30:30.0

खुलेआम लिखी जाती हैं सट्टे की पर्चियां

एसपी के आदेश का सदर कोतवाली पुलिस पर नहीं दिख रहा असर

हर रोज होती हैं नोंकझोंक, शांति भंग की संभावना से इंकार नहीं

उरई-जालौन (राहुल गुप्ता) नगर के आधा दर्जन स्थानों पर सट्टा माफियाओं के कारिंदों द्वारा खुलेआम सट्टा की पर्चियां लिखने का क्रम प्रातः होते ही शुरू हो जाता है। ऐसे स्थानों पर आये दिन सट्टा पर्चियां लिखने वाले व सट्टा खेलने वालों के बीच में गाली गलौज से लेकर मारपीट तक होती रहती है। लेकिन कोतवाली पुलिस ऐसे मामलों को अनदेखा कर न तो सटोरियों की धरपकड़ का अभियान चलाने से कन्नी काटती नजर आ रही हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि जब पिछले दिनों एसपी को नगर में फलफूल रहे सट्टा बाजार की वीडियो दिखायी गयी तो उन्होंने भी सटोरियों की धरपकड़ के लिये कोतवाली पुलिस पर भरोसा न कर स्पेशल पुलिस टीम को जिम्मेदारी सौंपी थी जिससे पहले ही दिन 14 कथित सटोरिये गिरफ्तार किये गये थे। इसके बावजूद भी नगर में सट्टा बाजार पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता था।
गौरतलब हो कि नगर में कोंच बस स्टैंड का क्षेत्र जहां एक सट्टा माफिया के लिये कमाई का जरिया बना हुआ है तो वहीं रामलीला मैदान, जिला पशु चिकित्सालय, मौनी मंदिर के आसपास का क्षेत्र तीन सट्टा माफियाओं की सुरक्षित शरण स्थली बनी हुयी है। इतना ही नहीं नगर के मुख्य बाजार में छुट्टन चाट वाली गली भी सट्टा लगाने के लिये विख्यात है जहां प्रातः से लेकर शाम तक सट्टा माफियाओं के कारिंदे अपने हाथों में कागज व पेन लेकर बैठ जाते हैं जो सट्टा खेलने वालों के नाम व जिस अंक पर सट्टा लगाया जाता है उसके आगे रुपये लिखते रहते हैं। सट्टा माफियाओं का अवैध धंधा यहीं पर आकर खत्म नहीं होता बल्कि कोतवाली के सामने दो पेट्रोल पंप के बीच से बजरिया मार्ग को जोड़ने वाली गली भी सट्टा कारिंदों की पसंब बनी हुयी है। इसके अलावा बजरिया में जयहिंद टाकीज के आसपास का क्षेत्र तो सट्टा माफियाओं के लिये अभेद दुर्ग माना जाता हैं। यह ऐसे स्थान हैं जहां कोतवाली पुलिस का कोई भी परिंदा सपने में भी सटोरियों को पकड़ने की बात सोच भी नहीं सकता है। नगर में अमरबेल की फलफूल रहे सट्टा कारोबार पर रोकथाम न लगने की असली तस्वीर यह है कि जब सट्टा माफिया कोतवाली पुलिस को निर्धारित नजराना एडवांस पहुंचाने में कंजूसी नहीं दिखाते तो फिर सदर कोतवाली पुलिस को ऐसे कमाई वाले स्थानों पर धरपकड़ करने की क्या पड़ी। सट्टा माफियाओं ने अपने अवैध कारोबार को संचालित करने के लिये बाकायदा ऐसा नेटवर्क तैयार किया है जिसमें कई सिपाहियों से लेकर दरोगा तक शामिल हैं जिन्हें नियमित रूप से उपहार स्वरूप चढ़ावा चढ़ाया जाता है। यह नेटवर्क इसलिये तैयार किया गया है यदि कोई पुलिस अधिकारी बगैर कोतवाली पुलिस को सूचना दिये यदि सटोरियों की धरपकड़ का अभियान चलाने का प्रयास भी करे तो उसकी पहले से ही सूचना सट्टा माफियाओं तक पहुंच जाती है। चूंकि नेटवर्क सिस्टम से जुड़े किसी एक खाकी बर्दीधारी तक भी यदि इस तरह की जानकारी आ जाती है तो वह तत्काल अपने मोबाइल फोन का प्रयोग कर उससे पूरे तंत्र को अलर्ट कर चेतावनी दे देता है। यही कारण है कि कभी कभार कोई पुलिस अधिकारी यदि सट्टा माफियाआंे की गर्दन दबाने का प्रयास भी करता है तो वह पुलिस की पकड़ से बाहर रह जाते हैं और उनके कारिंदे पुलिस की पकड़ में आ जाते हैं जिन्हें बाद में सट्टा माफियाओं के गुर्गे निजी मुचलका भरकर कोतवाली से बाहर ले जाते हैं। हालांकि पिछले दिनों जब मीडिया टीम ने नगर में संचालित सट्टा के काले कारोबार की गुपचुप तरीके से वीडियो बनाकर पुलिस अधीक्षक डा. राकेश कुमार सिंह को दिखायी तब उन्होंने सटोरियों पर लगाम करने का एक्शन लिया था जिसमें कोतवाली पुलिस को दूर ही रखा गया था। क्योंकि एसपी को इस बात का अंदेशा था कि यदि उन्होंने सदर कोतवाली पुलिस को इस बारे में जानकारी दी तो वह सट्टे के धंधे में लिप्त लोगों को इस बात की खबर पहुंचा देगी जिससे धरपकड़ अभियान फ्लाप हो जायेगा।

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