Top

छत्तीसगढ़ियों की भक्ति का परिणाम है, राजिम कुंभ का संत समागम - संतश्री प्रज्ञानंद

22 Feb 2017 5:07 PM GMT

छत्तीसगढ़ियों की भक्ति का परिणाम है, राजिम कुंभ का संत समागम - संतश्री  प्रज्ञानंद

राजिम महाकुंभ कल्प-2017

रायपुर - त्रिवेणी संगम पर चल रहे महाकुंभ के मंच से देशभर से पधारे संत-महात्माओं ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। संतश्री प्रज्ञानंद महाराज ने कहा कि धर्मानुरूप आचरण ही सुखी जीवन का मार्ग है। हमारे धर्म ग्रंथों में उल्लेखित प्रसंग ही जीवन की सही दिशा का बोध कराते है. इस अवसर पर संतों का अभिनन्दन करते हुए प्रदेश के धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता का सौभाग्य है कि संतों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन राजिम की पावन भूमि से मिल रहा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का धर्मानुरूप आचरण है. बिना भेदभाव के सबके विकास का काम कर रही है।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संतश्री प्रज्ञानंद जी महाराज ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग इतनी भक्ति करते है कि साधु संतों को आना पड़ता हैं। यह छत्तीसगढ़ की भूमि ऋषि मुनियों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास पढ़ने वाले हजारों होते है लेकिन धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल जैसे इतिहास गढ़ने वाले कुछ ही होते है। जहां संत वहां कुंभ होता है। मिलन से मेला बनता है। संत वे है जो जमाने को बदल देता है।
इस अवसर पर मंच से अपनी बात रखते हुए साध्वी अरूणा भारती ने कहा सत्संग से जीवन में अमुल्चूक परिवर्तन होता है। एक पल अच्छे मन से सत्संग सुन लेने से हमारा जीवन बदल सकता है। उन्होंने आगे कहा बाहर की गंदगी को दूर करने के लिए हम उपाय करते है लेकिन अपने मन के मैल को दूर करने के लिए उपाय करें तो परिवार और समाज के लिए बेहतर होगा है । सत्य चेतन महाराज ने कहा कि चिंतन मनन आवश्यक है। यह अंतरात्मा में झाँकने के लिए जरुरी है। उन्होंने सत्संग से मिलने वाले सुख को बताया।
संतश्री रामानुज सरस्वती जी ने है कि यहां तीन नदियां मिलती है तो संगम होती है। सभी संतों को खोजने के लिए भारत के कोने-कोने में जाना पड़ता है। लेकिन छत्तीसगढ़ शासन ऐसी व्यवस्था करती है कि सभी संतों को एक मंच में लाकर प्रजा आशीर्वाद दिलाती है। उन्होंने कहा कि भगवान प्राप्त करने के लिए वेद से लेकर उपनिषद तक भक्ति योग से परमेश्वर प्राप्त करते है। माता-पिता की सेवा करें तो हमें ईश्वर की प्राप्ति होगी। ब्रम्हकुमार नारायण भाई ने कहा कि ओम् शांति में गीता का पाठ छिपा है। चिन्तन किये जाने से सत्यता की पहचान होती है। यह एक जीवन का फार्मूला है। भगवान को पहचानना आसान है परन्तु पहले आप स्वयं को पहचाने।
तमीनतानंद जी महाराज ने कहा कि धर्मसत्ता और राज्य सत्ता का मिलन होता है तब प्रजा सुखी होती है। छत्तीसगढ़ में ऐसी परंपरा देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि हमारा भला तभी होगा जब हम अपना स्वार्थ छोड़ दें।
कैलाशनंदन जी महाराज ने कहा कि यह कुंभ मेला महाकुंभ लोककल्याण के लिए है। भागवत् में एक सूत्र है जिसमें कहा गया है कि वह स्थान बहुत शुभ हो जाता है जहां संतों का विराट समागम हो। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ दुनिया में अपनी छाप छोड़ रही है।
इस अवसर पर धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि संतों के आगमन से राज्य का सर्वांगीण विकास हो रहा है। छत्तीसगढ़ के धरती के बारे वर्णन करते हुए बृजमोहन ने कहा कि यह लोमश ऋषि, श्रृगी ऋषि की भूमि है। यहां माता सीता ने वनगमन के समय कुलेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की थी। कालीदास ने मेघदूत की रचना छत्तीसगढ़ में की है। यहा गांव-गांव में नवधा रामायण गाया जाता है।

  Similar Posts

Share it
Top