योगीराज़ में लोगों के छूट रहे पसीने, वोट देकर पछता रही जनता

2017-06-28 09:42:51.0

योगीराज़ में लोगों के छूट रहे पसीने, वोट देकर पछता रही जनता

24 घंटे बिजली का किया था वायदा, किन्तु 8 से 10 घंटे मिल रही बिजली

बिजली व बूंद बूंद पानी को मोहताज़ नगर की जनता, पिछले कुछ दिनों से विद्युत व जल संकट गहराया


कालपी/जालौन (राहुल गुप्ता) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव से पहले वादे तो बहुत बड़े बड़े किये थे, किन्तु जो प्रदेश की जनता की बुनियादी जरूरतें हैं उन्हें ही नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, निराश लोगों ने मीडिया को बताया कि भाजपा को वोट देना उनकी अब तक की सबसे बड़ी गलती है। प्रचंड बहुमत से जीत दिलाने के बदले जनता की बुनियादी जरूरतें बिजली व पानी ही नही दिया जा रहा।

योगीसरकार को कोसते हुए लोगों ने कहा कि गरीब व असहाय जनता जो अपने घर मे इन्वर्टर व मोटर नही लगवा सकती उस जनता का उत्पीड़न किया जा रहा है। इस त्रासदी का जनता आगामी 2019 के चुनावों में निश्चित तौर पर जवाब देगी।

जनता सरकार के रवैये से इस कदर त्रस्त है कि लोग कैमरे के सामने वोट देकर पछताने से भी नही चूक रहे। लेकिन अब जनता अपना दुखड़ा भला रोये किससे क्योंकि सुधार होते तो दिख नही रहे, हालात दिन प्रतिदिन और ज्यादा बिगड़ते हुए नज़र आ रहे हैं।

विद्युत विभाग व जल विभाग पूरी तरह से बेबस नज़र आ रहे हैं, हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोग रात जागकर व दिन में नींद पूरी कर रहे हैं व कुछ यही आलम पानी का है, नगर के ज्यादातर हैडपम्प खराब पड़े हैं व नलों में पानी आना भी टेढी खीर हो चुका है।

सवाल उठता है कि ऐसी नियंत्रण से बाहर हो रही स्थितियों की ओर जा रहे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री गड्ढा मुक्त सड़कें, विकास योजनाओं की बातों को तवज्जो देकर आखिर 2019 की तैयारियां करने में तो पीछे नही। किन्तु ढोल में पोल यानी बुनियादी जरूरतें ही नही पूरी हो पा रहीं तो भला जनता को योजनाएं किस हद तक प्रभावित कर पाएंगी।

बिजली व पानी को लेकर त्राहि त्राहि मची हुई है अब ऐसे में भला विकास का ख्याल किसे।

समय और हालातों पर प्रकाश डालें तो मुमकिन है कि आगामी चुनावों में बिजली पानी ही सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरे। यदि ऐसा होता है तो बीजेपी के लिए बेहद मुश्किल होगी।

एक बुजुर्ग ने मीडिया के जरिये कहा कि योगी जी इस भीषण गर्मी में हम गरीबों को सिर्फ बिजली व पानी दे दीजिए, बाकी कुछ भी नही चाहिए।

ख़ैर ना जाने कब इस गरीब आवाम की आवाज़ योगी जी तक पहुँचेगी या कहें कि ना जाने कब योगी जी इस आवाज़ को सुनेंगे। यह तो आगामी वक्त ही तय करेगा।

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