न्यायालय का आदेश बेअसर अवैध खनन चालू

न्यायालय का आदेश बेअसर अवैध खनन चालू

अल्हागंज- शासन प्रशासन और कोर्ट के तमाम आदेश और सख्तियों के बाद भी क्षेत्र में खनन रूकने का नाम नही ले रहा है। जिलाधिकारी का आदेश भी खनन रोकने में बेअसर हो चुका है। कोर्ट के द्वारा खनन की जांच सीबीआई के द्वारा फिर से कराई जा रही है। खनन रोकने के लिये माननीय न्यायालय के संज्ञान लेने तथा प्रदेश सरकार को इसे रोकने के लिये सख्त उठाने का आदेश देने के बाद भी अल्हागंज क्षेत्र में बालू और मिट्टी खनन चालू है। बीते दिनों जिलाधिकारी रामगणेश ने भी अधीनस्थ अधिकारियों को कड़े शब्दों में खनन पर रोक लगाने का फरमान सुनाया था। लेकिन अभी तक ऐसा कहीं से भी नही लग रहा है कि अल्हागंज प्रशासन बालू अथवा मिट्टी खनन रोकने के लिये कोई प्रभावी कदम उठा रहा हो। क्षेत्र में स्थित सभी भट्टो के द्वारा कुछ ट्रालियों की परमीशन एसडीएम के द्वारा ली जाती लेकिन परमीशन मिलने के बाद दो दो हजार ट्रालियां खुदावाई जाती हैं और भट्टों पर जमा की जाती हैं। ग्राम धर्मपुर पिडरिया और चिलौआ गांव के पास पडने वाली नहर से रातों रात मिट्टी का खनन होता है। जेसीबी रात भर चलती हैं। भट्टों पर मिट्टी के पहाड़ खड़े हो गए हैं। लेकिन न कोई अधिकारी इसे देखने वाला है न ही सुनने वाला है। भट्टों पर चलने वाली टैक्टर ट्राली का आरटीओ में रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। टैक्टर चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं हैं। भट्टों पर जो मजदूर काम करते है उन सब का श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन भी न के बराबर है। वहीं भट्टों पर मासूम बचपन जल रहा है। 14 वर्ष की आयु से कम उम्र के बच्चे ईट भट्टों पर काम कर रहे हैं। एसडीएम जलालाबाद की गाड़ी अल्हागंज क्षेत्र में आती है और भट्टों पर बने मिट्टी के पहाड़ों को देखकर चली जाती है। अधिकारियों पर अवैध खनन, बाल मजदूरी, पर्यावरण प्रदूषण का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। आखिर जलालाबाद अल्हागंज पुलिस प्रशासन इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहें हैं। नाम न छापने पर एक समाजसेवी ने बताया है कि क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन की समस्या की एक चिट्ठी उन्होंने सीबीआई आफिस दिल्ली के लिए लिखी है। अब देखने वाली बात यह है कि अब सीबीआई और जिला प्रशासन क्या करता है। क्या कहता है कानून ऐसा ही एक मामला कानपुर का है जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अमेठी के मोचवा गांव से 200 मीटर दूर स्थित ईट भट्टे को तत्काल बंद किये जाने का आदेश दिया है। साथ ही भट्ठा मालिक व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर पांच लाख रूपये का हर्जाना ठोंका है। परंपरागत ईट भट्टों से उत्सर्जित होने वाली हानिकारक गैस और धुआं पर्यावरण को बड़े पैमाने पर प्रदूषित कर रहे हैं। ईट भट्टों के आसपास रहने वाले लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियों में इजाफा होने से जब टीबी और अस्थमा के मरीजों की तादाद बढ़ी तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इस पर खासी आपत्ति जताई। साथ ही राज्य सरकार को प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए ईट भट्टों के बाबत नीति निर्धारित करने के आदेश जारी कर डाले। इन आदेशों की पालना करते हुए राजस्थान सरकार की तरह उ. प्र राज्य में ईको फ्रेंडली ईट भट्टे लगाने का फैसला किया है। बनारस के ईट भट्टा क्लस्टर को रोल मॉडल मानकर सरकार नई नीति तय करने में जुटी है। मिट्टी खनन के नियम शासन ने जेसीबी से खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ईट-भट्टा व्यवसाई अब दो मीटर से ज्यादा खनन नहीं करा सकेंगे। यदि वे ऐसा करते हैं तो खनन अधिनियम में फंस जाएंगे। वहीं दो मीटर का खनन भी मजदूरों के द्वारा कराया जाएगा। लेकिन यहां तो कहानी ही दूसरी है भट्टा मलिक. दो मीटर के बजाये पचासों मीटर तक गहरी खुदाई जेसीबी मशीन से कराते है जिससे कानून का पालन भी नहीं. हो रहा है। और मजदूरों का भी लाखों में घाटा. हो रहा है।

  Similar Posts

Share it
Top