छ.ग. विस में सरकार की कलई खोलदी बघेल ने

2017-03-09 12:00:07.0

छ.ग. विस में सरकार की कलई खोलदी बघेल ने

रायपुर (बृजनरायन साहू) विधानसभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लिया। उन्होने बजट में कई विभागों में स्वीकृत राशि का सिर्फ 50-60 प्रतिशत खर्च किए जाने पर सवाल उठाया प्रदेश सरकार योजनायें की खामियां गिनाते हुए प्रधानमंत्री आवास मुख्यमंत्री आवास और स्वच्छ भारत योजना के शौचालय बनाने के नाम से कलेक्टर द्वारा ग्रामीणों को डरा धमकाकर शौचालय बनवाने पर आपत्ति की इसके बदले राशन कार्ड निरस्त और सिंगल बत्ती कनेक्शन काट दिया जायेगा पर विरोध जताया।

भूपेश बघेल ने बताया कि सरकार दबावपूर्वक ओडीएफ गांव घोषित करवा रही है। शौचालय बनायी जायेगे अच्छी बात है किन्तु शौच हेतु उपयोग में लगने वाले पानी की भी समुचित व्यवस्था की जाये। सरकार सिर्फ गुणगान करने के लिये पूरे गांवों में शौचालय बना रही है किन्तु कई जगह पर समुचित पानी न होने के कारण उन शौचालय का उपयोग नहीं हो पा रहा है। जिस प्रकार से पानी की कमी के कारण वृक्षारोपण कार्य असफल हुआ है उसी प्रकार से शौचालय तब तक सफल नहीं होगा जब तक सरकार पानी की समुचित व्यवस्था नहीं करेगी।
सड़के बनाने के नाम से काफी गड़बड़िया सामने आ रही है उदाहरण देते हुये उन्होने बताया कि दुर्ग जिले में पूर्ण सड़को की संख्या शून्य और 9 लाख 60 हजार खर्च हो गया, बालोद में पूर्ण सड़को की संख्या शून्य और 329 लाख 16 हजार खर्च हो गया। इसी तरह सीमेंटीकरण में भी कार्य अधूरा है।

भूपेश बघेल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मेरे विधानसभा क्षेत्र पाटन में मिनी स्टेडियम का शिलान्यास किया था, एक पत्थर भी लगा दिया था किन्तु कैसे, क्या हुआ कि पैसे लेप्स हो गये। साल भर से अधिक समय पहले इसकी घोषणा की गयी थी। उसी तरह पाटन विधानसभा क्षेत्र में गौरव पथ का निर्माण दे दिया किन्तु आधा बनाकर छोड़ दिया गया। इन कार्यो को पूर्ण करने की मांग बघेल जी द्वारा की गयी।

भूपेश बघेल ने स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों लेते हुये बताया कि स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न प्रकार के रैकेट काम कर रहे है। जिसकी जानकारी मुख्यमंत्री जी को भी है। बर्रे के छत्ते में हाथ कौन डाले वाली बात हो रही है। इस विभाग में दवाई खरीदी का रैकेट, स्मार्ट कार्ड का रैकेट, डाॅक्टर का रैकेट, सामाग्री क्रय का रैकेट, रैकेट ही रैकेट है, जिसे खत्म करना अजय चंद्राकर जैसे सक्षम मंत्री के बस में भी नहीं है। मुख्यमंत्री ने बजट में हेल्थकार्ड की सीमा 30 हजार से 50 हजार करने की बात की है। हेल्थकार्ड ऐसे बन रहे है जैसे राशन कार्ड बनते थे। जिस प्रकार सरपंचो, पार्षदों के पास 100 से 150 राशन पड़े रहते थे आज कल स्मार्ट कार्ड और हेल्थकार्ड उसी प्रकार से बनने लगे है। इस खेल में बड़े-बड़े लोग शामिल है। यह जांच का विषय है कि इसमें कौन लोग मलाई खा रहे है? सब लोग मौन है। टेंडर में बीमा कंपनी 300 करोड़ के टेंडर में 700 करोड़ बांट रही है मैं समझता हूं कि दुनिया में ऐसी कोई कंपनी नहीं होगी जो 300 करोड़ के टेंडर में 700 करोड़ बांटे। जो जरूरत मंद नहीं है उनको भी बांटा जा रहा है।

भूपेश बघेल ने कहा कि सरकारी कर्मचारी और निजी फैक्टी में काम करने वालो को इस कार्ड को बांटने की कोई आवश्यकता नजर नहीं आ रही है क्योंकि सरकारी विभाग के कर्मचारियों के पूरे परिवार का स्वास्थ्य सरकारी विभाग द्वारा कवर किया जाता है। उसी तरह से निजी फैक्टी में काम करने वालो का ईएसआईसी कार्ड बना हुआ है। अभी बीच में रायगढ़ में 40 हजार फर्जीकार्ड का मामला सामने आया था। उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।

बघेल ने कहा कि ये रैकेट छोटा मोटा रैकेट नहीं है नीचे से लेकर मंत्रालय में बैठे हुये लोग भी इसमें शामिल है इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिये। पहले स्मार्टकार्ड में गर्भाशय निकालने का जो काम हुआ है उसे पूरा प्रदेश जानता है। आज कल मोतियाबिंद आपरेशन में स्मार्टकार्ड का दुरूपयोग हो रहा है। जो गैर डाॅक्टर और व्यवसायी है उन लोगो द्वारा नर्सिंग होम खोल कर स्मार्ट कार्ड का दुरूपयोग किया जा रहा है। सरकारी अस्पताल मेकाहारा में हेल्थ कार्ड और निजी हास्पिटल के बीच में सांठगांठ के चलते 4 विभागो की पीजी बंद करने की स्थिति आ गयी है इसमें स्त्रीरोग, जनरल सर्जरी, नाक, कान, गला एवं रेडियोलाजी विभाग है। सरकारी अस्पताल में डाॅक्टरों की कमी साफ-साफ दिखायी दे रही है। गुणवत्ताविहीन दवाईयां सरकार द्वारा खरीदा जा रहा है। एंबुलेंस की स्थिति ऐसी है जैसे रेल्वे स्टेशन पर उतरने पर कोई टैक्सी या होटल वाला बंधा रहता है। जैसे एक्सीडेंट होता है और 108 एंबुलेंस बुलाई जाती है तो ड्रायवर द्वारा मरीज के परिजनो से मरीज को हास्पिटल में ले जाने के लिये पैसे की मांग की जाती है।

भूपेश बघेल ने कहा कि डीकेएस भवन रायपुर के एकमात्र हास्पिटल था। छत्तीसगढ़ प्रदेश बना तो वह मंत्रालय बन गया। अब वह खाली है। जिस प्रकार मप्र में सुल्तानिया में छोटे बच्चों का हास्पिटल खोला गया है, उसी प्रकार डी.के.एस. भवन को छोटे बच्चो का हास्पिटल बनाया जाना चाहिये था किन्तु आपने उस भवन को सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल बना दिया। पहले आपने सुप्रीडेंट किसी और को नियुक्त किया। पिछले वर्ष साले की बात हो रही थी इस वर्ष दामाद की बात हो रही है। प्रदेश में जच्चा-बच्चा मुत्यु दर बहुत अधिक है इसलिये बेहतर होता कि वहां जच्चा-बच्चा अस्पताल खोल देते। आपको 400-500 बैड अतिरिक्त मिल जाता लेकिन आपने जवाई बाबू और दामाद बाबू को प्रसन्न करने के लिये सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल बना दिया। अध्यक्ष जी ने कहा कि सुनने में आ रहा है कि उस हास्पिटल के नाम पर 60 करोड़ का लोन लेने की तैयारी पूरी की जा चुकी है।

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