ग्राम समाज के तालाब खुलेआम कब्जों का बाजार गर्म

2017-03-16 09:45:37.0

ग्राम समाज के तालाब खुलेआम कब्जों का बाजार गर्म

उरई-जालौन (राहुल गुप्ता) सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद भी गांवों के तालाबों का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। दबंगों को न तो न्यायालय के आदेश का डर है और न ही जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों का कोई भय नजर आता है। यही कारण है कि गांवों में तालाबों का रकवा दिन पर दिन कम होता जा रहा है और अधिकारी केवल कागजी कार्यवाही कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करने में जुटे हुये हैं। जिन तालाबों के पानी से कभी गांव के पशु पालकों के पशु अपनी प्यास बुझाते थे ऐसे तालाबों का अस्तित्व खत्म करने पर दबंग भस्मासुर बन तालाबों की जमीन को मिट्टी से पूरकर उसमें या तो अपने पशुओं को बांध रहे हैं या फिर उन्होंने पक्के मकानों का निर्माण करा लिया है। ताज्जुब की बात तो यह है ऐसे तालाबों की सच्चाई से अधिकारी अच्छी तरह से वाकिफ है फिर भी वह ऐसे लोगों पर कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है जो तालाबों को खत्म करने पर तुले हुये हैं।

ऐसा ही मामला उरई तहसील क्षेत्र के ग्राम अकोढ़ी बैरागढ़ में स्थित पालों के तालाब का है जो गांव के मध्य में स्थित है। यही तालाब दशकों तक जानवरों की प्यास बुझाता था साथ ही ग्रामीण भी अपनी जरूरत के अनुसार पानी का प्रयोग करते थे। इतना ही नहीं गांव में अग्निकांड की घटना घटित होने के दौरान भी यह तालाब आग को बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। लेकिन विगत कई वर्षों से प्रशासन की उपेक्षा के चलते इस तालाब को ऐसा ग्रहण लगा कि जिसका रकवा एकड़ों में हुआ करता था वह आज डिसमिल में रह गया। तालाबों के चारों ओर दबंगों ने तालाब की जमीन पर मिट्टी से पूरकर कब्जा कर पहले उस पर पशुओं को बांधना शुरू किया इसके बाद उसी जमीन पर कच्चे व पक्के मकानों का निर्माण कर अपना कब्जा जमा लिया। मीडिया टीम ने जब गांव पहुंचकर पालों के तालाब का स्थलीय निरीक्षण किया तो वह अचंभित रह गयी कि जिस तालाब का रकबा दशकों का एकड़ों में फैला हुआ था उसका रकवा आज डिसमिल में रह गया। इसके बावजूद दबंग ग्रामीणों की गिद्ध दृष्टि तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा करने की लगी हुयी है। तालाब की स्थिति आज यह है कि एक ओर जहां तालाब में आज केवल घरेलू उपयोग के बाद जो गंदा पानी नालियों में बहता है वह तालाब में पहुंच रहा है जिससे कोई भी पशु अपनी प्यास तक नहीं बुझा सकता है। जब गांव के जागरूक ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करते हुये पालों के तालाब से अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग उठायी तो जांच दर जांच का क्रम शुरू हो गया। एक ओर जहां ग्रामीण तालाब से अवैध अतिक्रमण हटाने से संबंधित शिकायतें करते हुये तो वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने जिम्मेदारियों से मुक्त होकर जांच कराने का पिटारा खोल दिया। जांच में कई लोग दोषी भी पाये गये जून 2016 में जिलाधिकारी ने पालों के तालाब से अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश तहसील प्रशासन व बीडीओ डकोर को दिया था जिसमें साफ कहा गया था कि सप्ताह भर में पालों के तालाब को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया जाये। लेकिन अधिकारियों के काकनों पर जूं तक नहीं रेंगी और न ही उन्होंने ऐसे लोगों के विरुद्ध कोई कार्यवाही अमल में लाये जो तालाब की जमीन पर अपना अवैध कब्जा जमाये हुये हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पालों के तालाब पर हुये अवैध अतिक्रमण को हटाने के साथ ही उसमें पानी भरवाये जाने की मांग की है।
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