काम कम दादागीरी ज्यादा, एसबीआई बण्डा का रूल

2017-03-24 12:41:52.0

काम कम दादागीरी ज्यादा, एसबीआई बण्डा का रूल

शाहजहाँपुर (संदीप शर्मा) बंडा में स्थित भारतीय स्टेट बैंक में गुजरी सरकारों के दौर जैसी मनमानी अभी तक कायम है। पिछली सरकार मे मनमानी करते रहे इन कर्मचारियों की आदत सी हो गई है। आये दिन किसी न किसी ग्राहक से बहस व झगड़ा इनके लिए आम बात है नवम्बर 2016 में नोटबंदी हुई थी अब हर ब्रांचों में स्थित बिल्कुल सुधर चुकी हैं। लेकिन बंडा की स्टेट बैंक का एटीएम भी कभी कभी ही खुलता है जिससे जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा इतना ही नही शाखा प्रबंधक की मनमानी से जनता मे काफी गुस्सा व्याप्त है। गौरतलब है कि स्टेट बैंकों में कर्मचारी अधिकारी मनमानी करने के लिए ही तैनात किये जाते है और कोई ग्राहक इनकी हरकतों के खिलाफ मुंह खोलता है तो ये सीधे गुण्डागर्दी पर ऊतर आते हैं।
टब तो हाल यह है कि एसबीआई के पुरूष कर्मी फेसबुक और व्हाट्स्एप्प में लगे रहते है तो महिला कर्मी फोन पर अपने किसी परिचित या रिश्तेदार से चिपकी देखी जा सकती हैं। साथ ही डायल 100 भी सरकार ने इन्हें दे रखी है जिसके बल पर इनकी गुण्डई को सरकारी मान्यता मिल गयी है धमकी अगर ज्यादा बोलोगे तो 100 डायल गाडी खडी है सरकारी काम में दखल का मुकदमा ठुकवाउंगा।
यही नहीं बडे बुजुर्गों का तो सम्मान ही नही करते लाइन में लगे हो तो लगे रहो, जबकि सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग नियम बनाये हैं। हमें तो मासिक पगार मिल ही रही हैं, स्टेट बैंक बंडा एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ जब काम करने की इच्छा न हो तो बस एक बहाना मिल जायेगा कनेक्टिविटी फेल चल रही हैं एक छोटे से काम के लिए घण्टों खड़ा रहना पढता है अभी काम नहीं होगा।
ब्रांच के मैनेजर साहब उनसे तो बात ही मत करों अगर पूछ दिया कि काम क्यों नहीं हो रहा तो उल्टा पत्रकारिता सीखाने लग जाते है।

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