एक पुल भी नसीब नहीं हुआ, फिर भी भ्रम आज़ादी का

3 Aug 2018 8:15 PM GMT

बरेली - कहा जाता है कि 1947 में देश गुलामी से आज़ाद हो गया, लेकिन सच यह है कि देश विदेशियों की गुलामी से निकल कर देसियों की गुलामी में आ गया।

यानी सत्तर साल से देश देसियो की गुलामी मे है, गुलामी का एक छोटा सा उदाहरण आपको दिखाते है

गुज़रे सत्तर साल के अर्से में बरेली जिले में दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले रास्ते में शंखा नदी पर एक पुल नही बनाया गया, जबकि हज़ारो करोड़ विदेश तफरियों पर, हजारों करोड़ सालाना खददरधारियो को बांटे जाते रहे है लेकिन गुलामो को एक पुल नही दिया गया।

बरेली मे हो रही लगातार बारिश के चलते शंखा नदी पर बना रपटा पुल पानी का जल स्तर बढ़ने की वजह से डूबा दर्जन भर गांवो का रास्ता लगभग बन्द हो गया है मजबूरन गांव वाले जान जोखिम में डाल कर पुल से आवागमन कर रहे है।

ज़िले की ज्यादातर नहरों को बेचकर खा जाने वाले़ सिचाई विभाग को इससे कोई फर्क नही पड़ता

सीबीगंज और फतेगंज पश्चमी के कई दर्जन गावों का रास्ता है।

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