जानवरों से ज़्यादा सस्ती हुई इंसानी ज़िन्दगी

19 Jan 2019 9:00 PM GMT

यूपी के शाहजहांपुर में रोड पर घूम रहे जानवरों की दुर्दशा किस हद तक पहुंच चुकी है, यह आपको हम तस्वीरों में दिखा रहे हैं।

इनके लिए सरकार गौशाला जैसा कोई ठोस प्रबंध कर रही है, और ना ही यहां के सरकारी डॉक्टर इन जानवरों की मरहम पट्टी करते हैं।

आपको बता दें कि बंडा के खुटार रोड पर दर्जनों जानवर रोड पर घूमते हैं जोकि वाहनों की चपेट में आने के बाद बुरी तरीके से घायल हो जाते हैं, साथ ही वाहन चालकों की भी जान पर बन आती है।

इन जानवरों पर राजनीति तो हो रही है, लेकिन इन्हें देखने वाला कोई नहीं, ना तो इन जानवरों के लिए सरकार किसी गौशाला का इन्तेजाम कर रही है, और ना ही इन जानवरों को सरकारी डॉक्टर ही देख रहे हैं।

आवारा जानवर जब दर्जनों की तादाद में किसानों के खेतों में पहुंचते हैं तो फसल बरबाद होती है तब कई लोग इन जानवरों को पीट पीट कर घायल भी कर देते हैं और सरकार को कटघरे में खड़ा करते हैं।

किसानों का कहना है कि इन जानवरों के लिए सरकार अगर कोई ठोस प्रबंध नहीं करती तो आने वाले 2019 चुनाव सरकार पर भारी पड़ सकता है क्योंकि यह जानवर या तो खुद वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं और या फिर किसी राहगीर को मौत के हवाले कर देते हैं।

फिलहाल देखना यह होगा कि आखिर इन जानवरों का वली वारिस कौन होगा, सरकार गौशालाओं के लिए भूमि को कब्जा मुक्त कराने में तो जुटी हुई है, लेकिन सरकारी मशीनरी के चलते अभी तक नाम मात्र ही जमीने कब्जा मुक्त हो पाई हैं, लेखपाल कानूनगो खेत चिन्हित कर लेते हैं, लेकिन कब्जा नहीं हटवा सकते, क्योंकि उनके ही विधायक भू माफियाओं के कंधे पर हाथ रखे हुए हैं, इसीलिए मंचों का भाषण सिर्फ मंच तक ही सीमित रह जाता है।

शाहजहांपुर से संदीप शर्मा की रिपोर्ट

Sandeep Sharma

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