स्वास्थ्य महकमे का परिवार नियोजन कार्यक्रम कागजों तक

2017-01-13 12:30:26.0

स्वास्थ्य महकमे का परिवार नियोजन कार्यक्रम कागजों तक

कांशीराम कालौनी में रहने वाले अनेकों परिवारों में बेहिसाब बच्चे


उरई-जालौन (राहुल गुप्ता) इसे स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही समझा जाये या व्यक्तियों की अज्ञानता कि लोग एक के बाद एक बच्चे पैदा कर क्रिकेट की टीम तैयार कर रहे और जिम्मेदार विभाग कानों में तेल डालकर बैठा हुआ है। स्थानीय कांशीराम कालौनी में रहने वाले अनेकों परिवार ऐसे हैं जिनके पास आधा दर्जन से लेकर दर्जन भर तक बच्चों का भरापूरा परिवार है। अब ऐसे लोग अधिकारियों के लिये भी परेशानी का सबब बनने लगे हैं जो गरीबी का वास्ता देकर परिवार की आर्थिक मदद करने की गुहार लगाने पहुंचते हैं।

ऐसा ही एक मामला आज गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में देखने को मिला जब कांशीराम कालौनी निवासी गीता 50 वर्ष पत्नी राम सिंह अपने साथ चार बच्चों को लेकर जिलाधिकारी से मिलकर आर्थिक मदद दिलाने की गुहार लगाने आयी थी। मीडिया टीम ने गीता से जब जानना चाहा कि उसके कितने बच्चे हैं तो उसने बताया कि उसे 6 बेटियां व चार बेटे कुल मिलाकर 11 बच्चों के साथ माता-पिता मिलाकर 13 सदस्यों का भरापूरा परिवार है। जब गीता से मीडिया टीम ने परिवार नियोजन के बारे में जानकारी चाही तो उसने अनभिज्ञता जाहिर करते हुये कहा कि उसके पास आज तक स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम इस बारे में जानकारी देने नहीं पहुंची। महिला ने चैंकाने वाला खुलासा करते हुये कहा कि कालौनी में वह अकेली नहीं है जिसके इतने बच्चे हों। उसने बताया कि कांशीराम कालौनी में अनेकों परिवार ऐसे हैं जिनके आधा दर्जन से लेकर दर्जन भर तक बच्चे हैं। सवाल यह उठता है कि एक ओर स्वास्थ्य महकमा परिवार नियोजन के लिये अनेकों जागरूकता अभियान चलाने के नाम पर कागजी पुलिंदा तैयार करती है लेकिन उसके नुमाइंदों ने आज तक कांशीराम कालौनी में पहुंचकर ऐसे परिवारों को परिवार नियोजन कराने के प्रेरित करने का काम क्यों नहीं किया यह बात किसी के समझ में नहीं आ रही है। गौरतलब बात यह भी है कि जब कांशीराम कालौनी का गरीब लोगों को आवंटन किया जा रहा था यदि उस दौरान भी अधिकारी ऐसे लोगों के बारे में ध्यान देते जिनके आधा दर्जन या इससे अधिक बच्चे हैं और उन्हें परिवार नियोजन कराने के बाद उनके नाम से कालौनी का आवंटन करते तो निश्चित रूप से उनके परिवार में बढ़ते सदस्यों की संख्या पर रोक लगती और वह अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिये इस तरह से अधिकारियों के सामने आर्थिक मदद की गुहार लगाने न पहुंचते हैं। यदि आज भी स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन कर ऐसे परिवारों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक करें तो निश्चित रूप से ऐसे परिवारों में बढ़ते बच्चों की संख्या पर रोकथाम लगायी जा सकती है साथ ही परिवार नियोजन के बारे में ऐसी महिलायें भी जागरूक होंगी जिन्हें ऐसे उपायों के बारे में अब तक कोई जानकारी ही नहीं है।


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