शस्त्र नवीनीकरण की सुविधा शुल्क सौ रुपये

2017-01-13 12:45:45.0

शस्त्र नवीनीकरण की सुविधा शुल्क सौ रुपये

आरआई साहब आते दो बजे के बाद दूरदराज शस्त्रधारक होते परेशान
लाईसेंस धारकों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप करने की मांग

कालपी-जालौन (राहुल गुप्ता) अपने एंव अपने परिवार की सुरक्षा तथा धन की सुरक्षा हेतु लिये गये शस्त्रों के नवीनीकरण हेतु अपनाई गई प्रक्रिया से लाईसेन्स धारकों का जहां एक ओर आर्थिक शोषण हो रहा है वही दूसरी ओर 500 रुपया नगद जमा कराने तथा अन्य खर्चे अगर जोड़ दिये जावे तो एक लाईलेन्स के नवीनीकरण में कम से कम 2 हजार रुपया का खर्च रहना पड़ रहा है।
गौरतलब हो कि पूरे जनपद जालौन के सभी थाना क्षेत्रों के लाईसेंस धारको को कालपी से 4 किलोमीटर दूर बने मगरौल निर्माणाधीन पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र सेन्टर में जाकर पहले फायरिंग करनी पड़ती है तथा फायरिंग करने से पूर्व 5 सौ रुपया नगद जमा कराये जाते है जिसकी रसीद भी नही दी जाती है उक्त धनराशि किस मद में किस लिये ली जाती है इसका कोई अता पता नही है।
फायरिंग स्थल पर पुलिस लाईन के अधिकारी आर.आई दोपहर 2 बजे के बाद आते है तब तक सैकड़ो की संख्या में लाईसेंस धारक भूखे प्यासे तड़फते हुये आर.आई साहब का इुतजार करते रहते है। जब उक्त अधिकारी आते है तब लम्बी लाईन में लाईसेंस धारक अपनी-अपनी बंदूक, रायफल लेकर खड़े हो जाते है घंटो इंतजार के बाद शांय 5 बजे तक आखिरी व्यक्ति का नम्बर आता है। अधिक शांय हो जाने के बाद कुछ लाईसेंस धारक जो पैदल वाले है वह जंगल की रास्ता तय करके कालपी आते है। तथा देर रात तक अपने - अपने घरों में पहुंच पाते है। कुछ लोग तो दूसरे दिन अपने घरों में पहुंचे पाते है जो अपने संबंधी के यंहा रात व्यतीत करनी पड़ती है।

सुबह 10 बजे से शुरू करने की मांग
आधिकांश लाईसेंस धारकां की मांग है कि हमें शासन के आदेश मानने में कोई एतराज नहीं है लेकिन यह प्रक्रिया सुबह 10 बजे से शुरू हो जाना चाहिये जिससे कैलिया, गोहन, कोंच, डकोर, रामपुरा, नदीगांव, मार्धोगढ़ जैसे दूराच ग्रमीणों को फायरिंग करके जल्दी वापिस लौटने का सही मौका मिल सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है अधिकारियों का वही रवैया है जिससे जनता परेशान हो, शोषण कराने को मजबूर है।
बुधवार के दिन उक्त फायरिंग का टेस्ट होता है इस लिये हजारों की संख्या में लाईसेंस धारक उक्त जंगल में बने फायरिंग स्थल की धूल सुबह से ही चाटते हुये पुलिस अािकारियों का इंन्तजार करते रहते है।

जल-पान की व्यवस्था न होने से लाईसेंस धारक परेशान
प्रस्तावित फायरिंग स्थल पर चाय नास्ता का कैन्टीन न होने से लाईसेंस धारक जंहा एक ओर शुद्ध पानी को पीने के लिये परेशान रहते है वही चाय नास्ता की कोई दुकान न होने से लोग सुबह 10 बजे से शांय 5 बजे तक भूखे प्यासे तड़फते रहते है।

जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग
शस्त्र धारकों ने जिलाधिकारी जालौन श्रीमती संदीप कौर से मांग की है कि मगरौल में बने फायरिंग स्थल पर अधिकारी सुबह 10 बजे पहुंचे जिससे प्रत्येक शस्त्र धारक को घंटो लाईन में न लगना पड़े तथा 5 सौ रुपया जो लिये जाते है उसकी रसीद मिलनी चाहिये यह इस प्रदेश का दुर्भाग्य है कि पुलिस के अधिकारी खुलेआम 5 सौ रुपया ले रहे है लेकिन रसीद नही देते है। इससे बड़ा भृष्टाचार और क्या हो सकता है इस कुकृत्य पर जिलाधिकारी को तत्काल रोक लगानी चाहिये। इतना ही नहीं फायरिंग का प्रमाण पत्र भी तुरंत नही मिलता है वंहा पर मौजूद पुलिस कर्मी कहते है कि प्रमाण पत्र बाद में पुलिस लाईन आकर लेना पड़ेगा। अब लाईसेंस धारक पहले फायरिंग का टेस्ट दे फिर 2 सौ रुपया खर्च करके उरई पुलिस लाईसेंस जाकर प्रमाण पत्र हासिल करें। इस प्रक्रिया को भी सुविधा जनक बनाकर तत्काल प्रमाण पत्र देने की भी मांग जिलाधिकारी से की है।

अपनी तथा गौवंशी सुरक्षा हेतु लिये गये लाईसेंस धारकों को इतनी परेशानी क्यों उठानी पड़ती है यह भी एक विचारनीय प्रश्न चिंह है जबकि प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा करना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है और जिन गांवों में अधिकांश शस्त्र होते है वंहा पर चोर, बदमाश, डकैट नही आते है क्यों कि उन्हे भय रहता है कि इस गांव में असलाहा है कही डकैतो पर हमला न हो जावे। जब लाईसेंस धारक इतनी बड़ी जिम्मेदारी सम्भालता है तो फिर उसे नवीनीकरण के नाम पर इतना परेशान क्यो किया जाता है बहुत पहले लाईसेंस धारक को बड़े सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। अब तो लाईसेंस धारक को घृणा की दृष्टि से पुलिस देखती है जबकि लाईसेंस धारक पुलिस की कानून व्यवस्था में सहायता करता है।

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