त्योहार की आहट के साथ ही मिलावट खोरों का धंधा तेजी पर

2017-03-11 13:12:13.0

त्योहार की आहट के साथ ही मिलावट खोरों का धंधा तेजी पर

कालपी/जालौन (राहुल गुप्ता) होली मिलावट का जहर आपकी त्योहार की खुशियों में खलल डाल सकता है। वैसे भी त्योहारों पर तरह-तरह के व्यंजन बनाये जाते हैं और होली मिलने घर आने वाले लोगों का स्वागत भी अबीर गुलाल और मिठाइयों के साथ किया जाता है। ऐसे में होली से पहले की मिठाइयों की खरीददारी तेज हो जाती है। लिहाजा 'मिलावट खोरों का धंधा भी तेजी पकड़ लेता है। बस जरूरत है सतर्कता की, थोड़ी सी भी लापरवाही रंग में भंग कर सकती है। 'कालपी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की आपूर्ति कम हो रही है। मगर दूध से बने सामानों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। त्योहार के समय तो मावा और दूध से बने उत्पादों की मांग और भी विकट हो जाती है। आपूर्ति कम होने के बावजूद यह डिमांड पूरी होती है। दूध की कमी होने के बावजूद मावा, पनीर और दूध से बने खाद्य सामाग्री की कमी बाजार में नहीं होती है। बाजार से खरीदी मिठाई से आप त्योहार का मजा तो ले सकते हैं। मगर संभल के यह मिलावटी निकली तो आप को बीमार भी बना सकती है। ऐसे में होली की उमंग और रंग दोनों फीके पड़ सकते हैं। पहले लोग बाजार से मावा खरीदकर घर पर गुझिया या अन्य मिठाई बनाते हैं। अब समय के अभाव में लोग बाजार से बनी बनाई गुझिया खरीद लेते हैं। आज भी बाजार में मावे की मिठाई और दूध से बने अन्य व्यंजनों की कोई कमी नहीं है। होली पर अचानक मिठाइयों की मांग बढ़ती है, उसे हर वर्ष पूरा भी किया जाता है। जगह-जगह दुकानें सजती हैं और त्योहार के कई दिनों बाद तक दुकानों पर मिठाइयों का ढेर लगा रहता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि होली पर मिलावटी दूध और मावे से विभिन्न प्रकार की मिठाइयां बाजार में बिकती हैं। जाने-अनजाने में हम खुद ही अपनी और परिवार के लोगों के जान जोखिम में डाल देते हैं। सोचिये यदि यह मावा या इससे बनी मिठाइयां बाजार में आती तो जरूर लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक सिद्ध होती। इसलिए पूरी सतर्कता के साथ ही मावा या इससे बनी मिठाइयां ही खरीदें।


ऐसे बनता है मिलावटी मावा :-
मिलावटी मावा बनाने के लिए दूध की बजाय दूध पावडर, रसायन, आलू, शकरकंदी, रिफाइंड तेल आदि प्रयोग किए जाते हैं। सथेटिक दूध बनाने के लिए पानी में डिटर्जेट पाउडर, तरल जैल, चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड व मोबिल आयल एवं एसेंट पाउडर डालकर दूध को बनाया जाता है। यूरिया का घोल व उसमें पाउडर व मोबिल डालकर भी ¨सथेटिक दूध तैयार किया जाता है। इसमें थोड़ा असली दूध मिलाकर सोखता कागज डाला जाता है। इससे बड़े पैमाने पर नकली मावा व पनीर भी तैयार किया जाता है।

ऐसे करें मिलावटी मावे की पहचान :-
मावे में मिलावट की पहचान आयोडीन जांच या फिर चखकर उसके स्वाद और रंग से की जा सकती है। सामान्य तौर पर लोग आयोडीन की जांच नहीं कर पाते। लेकिन मिलावटी मावे से बचने के लिए उसे पूरी तरह जांच परख ले। मिलावटी या नकली मावे का स्वाद व रंग सामान्य से विभिन्न और कुछ खराब होता है। खाद्य सामग्री के जानकार कहते हैं कि असली मावा पानी में डाला जाये तो वह आसानी से घुल जाता है और यदि उसमें मिलावट होगी तो वह पानी में पूरी तरह से नहीं घुलेगा। मिलावटी मावे में चिकनाहट नाममात्र की होती है।

मिलावटी मिठाई से बीमारियों को दावत :-
मिलावटी दूध व मावे से बनी मिठाई, पनीर व घी खाने से किडनी व लीवर को काफी नुकसान होता है। इसके साथ ही सिर दर्द, पेट दर्द व त्वचा रोग हो सकते हैं। इससे पेट खराब होने और पीलिया या आंतों में संक्रमण जैसी बीमारियां हो सकती है। मिलावटी मावा या मिठाई से किडनी को भी नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन थोड़ी सी सतर्कता से मिलावटी मावा या मिठाइयों से होने वाली बीमारियों से परिवार के सदस्यों को बचा सकते हैं।
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