रंगपंचमी पर शुरू हुआ मन्नतों का मेला

2017-03-17 06:15:51.0

रंगपंचमी पर शुरू हुआ मन्नतों का मेला

राई नृत्य का दिखेगा जलवा

अशोकनगर (हेमंत यादव) देशभर और प्रदेशभर में आज रंगपंचमी का त्यौहार मनाया जा रहा हैं। मध्यप्रदेश केअशोकनगर जिले के करीला में स्थित माता सीता के मंदिर पर हर साल रंगपंचमी पर मन्नतों का मेला लगता है। यहां मन्नत पूरी होने पर राई नृत्य कराने की परंपरा है। यह स्थान पूरे प्रदेश में विख्यात है। यहां पर माता सीता और लव-कुश के मंदिर पर लोग अपनी मन्नतें मांगने आते हैंऔर मनोकामना पूरी होने पर यहां पहुंचकर राई नृत्य बधाई के रूप में करवाते हैं।

मान्यतानुसार लवकुश और माता सीता के इस मंदिर में निःसंतान दंपती की सारी मनोकामना पूरी हो जाती है,तो उन्हें यहां बेड़निया नचाना होता है। इस मंदिर की लोग अपने घर में भभूति लेकर जाते हैं। माना जाता है कि यह खेत में कीटाणु नाठक और इल्लीनाशक का भी काम करती है। और किसान मानते हैं कि इस भभूति को फसल पर डालने से चमत्कारी ढंग से इल्लियां गायब हो जाती हैं। किसान हर साल यहां आकर भभूति लेकर जाते हैं,और अपनी को फसल में डालते हैं।

माना जाता हैं, कि जब भगवान राम को माता सीता अयोध्या में अकेला छोड़कर चली गईं थीं, तब वे अशोकनगर जिले के मुंगावली विकासखण्ड के ग्राम पंचायत जसैया में स्थित करीला की पहाडियों पर रुकी थीं। ऐसी मान्यता है कि माता सीता यहां बने बाल्मीकि ऋषि के आश्रम में ठहरी थी और यहीं उन्होंने लव-कुश को जन्म दिया था। सम्भवत यह देश का इकलौता मंदिर है, जहां राम के बगैर सीता की प्रतिमा हैं।

चूंकी रंगपंचमी का त्योहार बेड़िया जाति के लिए बेहद खास माना जाता है। इसलिए यहां हर साल रंगपंचमी पर मेला लगता है। देश-विदेश के भक्त यहां आकर मन्नत मांगते हैं। यहां मन्नत की एक और अनोखी प्रथा है। यह तीन दिन चलेगा। जिसमें लगभग देशभर से 20 लाख लोग शामिल होंगे। यह देश का एक मात्र ऐसा मेला है, जहां बेड़नियों का नृत्य देखने के लिए सिर्फ एक दिन में लाखों की भीड़ आती हैं। इस मेले की शुरुआत गुरुवार से हो गई हैं, जो शनिवार तक चलेगा। पहले ही दिन करीब 3-4 लाख लोग पहुंचे हैं।

यहां प्रसिद्ध है राई नृत्य
देशभर में इस मेले की चर्चाएं होती आई हैं। करीला की प्रसिद्धि राई नृत्य से ही है। मशालों की रोशनी में ढोलक की थाप पर उनका बुंदेलखण्डी राई नृत्य देखते ही बनता है। महिलाएं पथरीले मैदान पर नंगे पैर नृत्य करके मन्नत मांगती हैं। मेले में वैसे तो बेड़िया जाति की महिलाओं द्वारा राई नृत्य किया जाता है, लेकिन अब कुछ सालों से राजस्थान से कंजड़ जाति की महिलाएं भी नृत्य करने आने लगी हैं।

ये है मान्यता
मान्यता के अनुसार जब यहां लव-कुश का जन्म हुआ तब स्वर्ग से अप्सराओं ने उतरकर नृत्य किया था। बस तभी से यहां राई व बधाई नृत्य करवाने का दौर शुरू हुआ। इसके लिए बड़ी संख्या में नृत्यांगनाएं मंदिर पर पहुंचती हैं।

नेता भी टेकते हैं यहां मत्था
करीला मेले की प्रसिद्धि इस बात से लगाई जाती है कि वहां देश की बड़ी-बड़ी जगह दिल्ली, बम्बई, बिहार, कलकत्ता से भी लोग मेले मां जानकी के दर्शन करने पहुंचते हैं और मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर राई नृत्य कराने पहुंचते हैं। चुनाव के समय दिल्ली, भोपाल, लखनऊ सहित अन्य शहरों के बड़े-बड़े नेताओं की भीड़ जानकी दरबार में मत्था टेकते व राई नृत्य करवाते देखी जा सकती है।

इतिहास से जुड़ा हैं करीला का मेला
आज से लगभग 200 वर्ष पहले की बात हैं।मप्र के विदिशा जिले के ग्राम दीपनाखेडा के महंत और तपसी महाराज को एक रात सपना आया की करीला ग्राम में टीले पर स्थित आश्रम में मां जानकी और लव कुश कुछ समय रहे थे। यहां बाल्मिकी आश्रम वीरान पड़ा हुआ है, वहां जाकर आश्रम को जागृत करो। अगले दिन सुबह होते हुए तपसी महाराज करीला पहाड़ी को ढूंढने के लिए चल पड़े। इसके बाद वो देखते हैं की जो-जो उन्होंने सपने में देखा था वो-वो सच हो रहा हैं। यहां तो सच में भी करीला पहाड़ी पर एक आश्रम हैं। यहां करील के पेड़ अधिक संख्या में होने के कारण इस स्थान को करीला कहा जाता है। तपसी महाराज इस पहाड़ी पर ही रुक गए तथा स्वयं ही आश्रम की साफ-सफाई में जुट गए। उन्हें देख आस-पास के ग्रामीणजनों ने भी उनका सहयोग किया। तपसी महाराज ने लगभग 40 साल तक आश्रम की सेवा की। उनके बाद अयोध्या आश्रम से बलरामदास महाराज करीला आए।

यहां से जुटती हैं भीड़
मेले में मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और उत्तरप्रदेश से सबसे ज्यादा लोग पहुंचते हैं। इसके बाद महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा और बाकी प्रदेशों का नंबर आता है। बताया जाता हैं की मेले में साल 2014 में 15 लाख लोगों की भीड़ इकट्ठी हुई थी, जो कि अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।अब देखना हैं की क्या ये रिकार्ड इस साल टूट पाता हैं, की नहीं।

ऐसे होगी मेले की व्यवस्था
इस मेले में लगभग बीस लाख लोगों के पहुंचने की संभावना हैं इसलिए तीन हाईमास्ट लगाई गई हैं। करीब 3 हजार अस्थायी शौचालय लगाए गए हैं।इसके अलावा मेले में करीब 1000 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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