नैनीताल में कार पलटी, ना पुलिस ना मोबाईल नेटवर्क

2017-05-28 12:26:26.0

नैनीताल में पलटी कार, मोबाईल नेटवर्क नही थे, एम्बूलैंस या पुलिस के लिए फड़फडज्ञते रहे लोग, डेढ़ घण्टे बाद पहुचें दो सिपाही, यूपी में अखिलेख यादव की डायल 100 बहुत याद आई, राहगीरों ने ही कड़ी मेहनत से निकाला घायलों को, एक स्कूली बस से भेजा अस्पताल।

उ0प्र0 की अखिलेश सरकार को गुण्डाराज कहने वाली बीजेपी की सरकार के मुंह का पानी उस वक्त उतर गया जब कालाडूंगी से नैनीताल मार्ग पर एक स्कार्पियों पलट गयी जिसमें चार लोग सवार थे। उस वक्त वहां एवीएन के डा0 यासीन, रफी मंसूरी, जीशान अली ही गुजर रहे थे तीनों ने आनन फानन में गाड़ी में फंसे सवारों को बचाने की कोशिश शुरू करदी। तीन लोग की हजार कोशिशों के बाद भी गाड़ी के ड्रावर को नही निकाला जा सका इतनी देर में दर्जनों राहगीरों भी इकटठे हो गये और गाड़ी को सीधा करके चालक को निकाला।

मामला गुजरी 25 मई का है। लोग पुलिस एम्बूलेंस को फोन करने के लिए अपने अपने मोबाईलों से जूझते रहे लेकिन नेटवर्क ना मिलने की वजह से बेबस दिखाई दिये, कुछेक ने तुरन्त अपनी मोटर साईकलों से नैनीताल व कालाडूंगी की तरफ दौड़ लगाई। लेकिन किसी को पुरे रास्तों पर पर पुलिस नाम की चीज नही दिखाई दी। खबर देने को नेनीताल की तरफ दौड़ रहे एक व्यक्ति को नैनीताल के पास दो सिपाही आराम करते दिखे तो उन्हें सूचित किया।

ऊधर बचाव कर रहे राहगीरों ने एक स्कूली वाहन वाले की मिन्नते करके घायलों को अस्पताल भेजा। लगभग डेढ़ घण्टे बाद दो सिपाही मोके पर पहुंचे लेकिन तब तक वहां सिर्फ खून ही रह गया था। डेढ़ घण्टे बाद मोके पर पहुचे सिपाहियों ने आते ही कानून बताना शुरू कर दिया जिसपर एवीएन के डा0 यासीन ने उन्हें फटकार लगादी, इसपर दोनों वहां से खिसक लिए

यहां सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि लम्बी चैड़ी डींगे हाकने वाली बीजेपी के राज में पूरे रास्ते पर ना तो पुलिस व्यवस्था रहती है ना ही मोबाईल नेटवर्क।

इस दौरान उ0प्र0 से जाने वाले राहगीरों को उ0प्र0 की पूर्व अखिलेश सरकार की डायल 100 बहुत याद आई। लेकिन घायलों की बदकिस्मती यह थी कि यहां बीजेपी की सरकार है जिसमें सिर्फ बाते करना और देश की हिन्दू मुस्लिम एकता को खत्म करके देश को कमजोर बनाने के अलावा कुछ नही किया जाता।

एक घण्टे के इस दुख भरे हालात में बचाव कार्य में लगे दर्जनों लोगों में एवीएन की टीम ने हिन्दू मुस्लिम को पहचानने की कोशिश की लेकिन वहां ना कोई हिन्दू दिखा ना मुसलमान, हां दिखे तो सिर्फ इंसान, घायलों की मदद में पसीना पसीना हो रहे राहगीरों में से किसी ने घायलों से नही पूछा कि वे हिन्दू हैं या मुसलमान।

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