65 साल में तीस हजार की आबादी को एक सड़क तक नहीं दे सके खददरधारी

2017-02-16 19:08:00.0

65 साल में तीस हजार की आबादी को एक सड़क तक नहीं दे सके खददरधारी

चुनाव का बहिष्कार सही विकल्प नहीं, प्रत्याशी पसन्द नहीं तो नोटा का बटन दबाएं-एसडीएम

कोंच-जालौन (राहुल गुप्ता) जिले की जर्जर सड़कें अब चुनावी मुद्दा बन कर नमूदार हो रहीं हैं। नदीगांव विकास खंड के कमोवेश पंद्रह गांवों के ग्रामीणों ने ऐलान कर दिया है कि वे मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी तय कर लिया है कि प्रत्याशियों को वोट मांगने के लिये इन गांवों में घुसने भी नहीं देंगे। ग्रामीणों के इस ऐलान से जहां प्रत्याशियों की घिगघी बंध गई है वहीं प्रशासन के माथे पर पसीने की बूंदें साफ देखीें जा सकती हैं। प्रशासन इन ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी तक वे उन्हें मतदान में हिस्सा लेने के लिये राजी नहीं कर सके हैं। सड़क नहीं होने से लगभग तीस हजार की आबादी बुरी तरह से प्रभावित है।

नेताओं के कोरे वायदों से गुस्साये अब पंद्रह गांवों के ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग को लेकर सड़कों पर हैं, उन्होंने श्सड़क नहीं तो वोट नहींश् का नारा गढ कर राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के गांवों में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। ग्रामीणों ने ऐसे कई बैनर टांग रखे हैं जिन पर लिखा है कि श्रोड नहीं तो वोट नहीं।श् दो दशक पूर्व निर्मित सदूपुरा-रेंढर मार्ग अब पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुका है। बारिश में यह मार्ग दलदल में तब्दील हो कर वाहनों और पैदल लोगों की रफ्तार थाम देता है। इस 13 किमी लंबे मार्ग पर कमोवेश पंद्रह गांव सिवनी बुजुर्ग, सिवनी खुर्द, तजपुरा, पजौनिया, कन्हरपुरा, रूरा, जुगराजपुरा, गोवर्धनपुरा, बरहा, झीलरा, भगवंतपुरा, देवरी, सुलखना, रेंढर आदि पड़ते हैं जिनके रहने बालों के लिये ये मार्ग बदहाल रोड भारी मुसीबत का वायस बना है। इन गांवों के रहने वाले ग्रामीणों राजू जाटव, शिवचरन, समरसिंह, राजकुमार, महेन्द्र, रामसिंह, भरतकुमार, मानसिंह, मानवेन्द्रसिंह, इरफान आदि का कहना है कि यहां के लोग डेढ दशक से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार की घोषणा कर सड़क निर्माण की मांग रखी थी ता उस वक्त के भाजपा प्रत्याशी मौजूदा सांसद भानु प्रताप वर्मा ने सड़क निर्माण कराने का भरपूर आश्वासन दिया था लेकिनचुनाव खत्म हो जाने के बाद उन्होंने इस सड़क की ओर मुड़ कर भी नहीं देखा।

ग्राम प्रधान सिवनी शिवराज सिंह बताते हैं कि नेताओं के झूठ से गुस्साये ग्रामीणों ने अब मतदान बहिष्कार का फैसला ले लिया है। ग्रामीण अब किसी भी प्रत्याशी को यहां प्रचार के लिए नहीं आने देने पर भी आमादा हैं।

गौरतलब यह भी है कि मंगलवार को सेक्टर मजिस्ट्रेट बीके गुप्ता ग्राम सिवनी बुजुर्ग पहुंचे थे और उन्होंने ग्रामीणों से बात भी की कि अगर उन्हें किसी प्रत्याशी को वोट नहीं देना है तो वे नोटा विकल्प अपना सकते हैं लेकिन फिलहाल ग्रामीणों ने उनकी सुनी नहीं है। बताया गया है कि कल गुरुवार को एसडीएम मोईन उल इस्लाम गांव जाकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करेंगे।

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