UP ELECTION 2022

विधायकों और प्रधान से दुखी होकर चुनाव का बहिष्कार - प्रधान पर धर्मवाद का आरोप

आचार संहिता लागू होते ही आ गइ विकास की बाढ़। गांव का विकास चढ़ रहा है धर्मवाद की भेंट। विधायक कभी लौटकर नहीं आते तो गांव के प्रधान पर धर्मवाद का आरोप है। हम बात कर रहे हैं यूपी के बरेली ज़िले के गांव घंघोरा घंघोरी की। ये तस्वीरें है ग्राम सभा पिपरया के गांव घंघोरा की। गांव के प्रवेश मार्ग को देखकर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं मोदी योगी के विकास का। गांव वाले विकास के लिए तरसते गांव वालों से हमने बात की। एक तरफ़ जहां लगातार दो बार बीजेपी के बहोरनलाल मौर्या को विधायक बनाने का गांव वालों को पछतावा है तो साथ ही पार्टी बाज़ी के दबाव में बीजेपी के उम्मीदवार को वोट देना मजबूरी भी है। बीजेपी प्रभु श्रीराम और हिन्दुत्व को मोहरा बनाकर आस्था पर चोट करती है। हिन्दू वोट मजबूर हो जाता है भगवान और धर्म के नाम पर। लेकिन प्रधान से लेकर सांसद तक के हाथों लगातार ठगे जाने से परेशान होकर ग्राम सभा पिपरया के घंघोरा गांव के बाशिन्दे इस बार मतदान का बहिष्कार करने का मन बना लिया है। यूपी मे विधान सभा चुनाव का बिगुल बजने और आचार संहिता लागू होते ही मानों विकास की बाढ़ आ गई हो। हमने आपको बरेली रामपुर रोड पर शुरु किये गये डिवाईडर कार्ड और सनैया धनसिंह मे गलियो के निमार्ण बंशी नगला में सड़क निर्माण का काम आचार संहिता लागू होने के बाद शुरु होने की बाबत बताया था। आज गांव घंघोरी में नाले की साफ़ सफाई का काम शुरु होने से रुबरु कराते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सब वो काम हैं जो गुज़रे 75 साल में नहीं किये गये लेकिन यूपी चुनाव के दौरान शुरु कर दिये गये। ये तस्वीरें हैं घंघोरी की। तस्वीरों में विकास की ज़मीनी हक़ीक़त आप देख सकते हैं। गांव के मुख्य प्रवेश मार्ग की का नज़ारा आपके सामने है। सड़क पर भरा गन्दा पानी स्कूल में घुस चुका है। गांव वालों का साफ़ आरोप है कि प्रधान केवल मुस्लिम एरियों में ही काम कराता है। मुस्लिम बाहुल्य ग्राम सभा है इस लिए लगातार बीस साल से प्रधानी एक ही परिवार के क़ब्ज़े में रहती है। प्रधान को कुर्सी छिन जाने का डर नहीं रहता।