UP ELECTION 2022

किराये के कैमरों के बल पर विधायक बनने के सपने

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किराये के कैमरों के सहारे विधायक बनने के सपने। यूपी विधान सभा चुनावों के बीच जब किसी पार्टी या उम्मीदवार के पास कोई उचित मुददा नहीं है। पार्टियों और उम्मीदवारों के वादों से मतदाता पूरी तरह तंग आ चुके हैं। नतीजा यह दिख रहा है कि इस बार प्रत्याशियों के साथ उनके सगे सम्बन्धियों के अलावा कोई नहीं दिख रहा है। वजह सिर्फ़ यही है कि जनता जुमले सुन सुनकर पक चुकी है। जनता से कई हज़ार गुना वे लोग खुद को ठगा हुआ और अपमानित महसूस करने लगे हैं जो लोग प्रत्याशियों की तरफ़दारी करके ग़ुलाम वोटरों को फंसाते थे। ग़ुलाम मतदाता अपने पास पड़ोस और पहचान के लोगों की बात पर भरोसे करके वोट दे देते थे लेकिन जीतते ही प्रत्याशी का भस्मासुरी रुप ना सिर्फ़ वोट देने वालों को ही पावर दिखाने लगता है बल्कि वोट दिलवाने वालों के भी लात मारने से नहीं चूकता। नतीजा सामने आने लगा अब ख़ास चमचों के अलावा लगभग सभी बचने लगे। साथ ही चुनाव आयोग ने भी ऊल जलूल प्रचार पर रोक लगा दी। ऐसे में प्रत्याशियों ने फ़ार्मूला तलाशा। ज़ाहिर है कि मीडिया के पालतू धड़े के अलावा वास्तविक मीडिया तो प्रत्याशियों के क़दम क़दम पर पीछे पीछे कैमरे लेकर दौड़ेती नहीं इसलिए प्रत्याशियों ने मोबाइल मेडेड मीडिया यानी व्हाट्सपिया फेसबुकिया यूट्यूबिया मीडिया को हायर कर लिया। 500 से 1000 रुपये प्रति ख़बर की मज़दूरी पर मोबाइल मेडेड मीडिया बांस का बतंगड़ बनाकर प्रसारित करके कमाई में जुटी है। यूपी विधान सभा 2022 के दौरान ये खेल काफ़ी फल फूल रहा है। अगर हम सिर्फ़ बरेली ज़िले की ही बात करें तब देखा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवार 500 से 1000 रुपये प्रति ख़बर के सहारे अपनी अपनी बढ़त दिखवाकर हू बनाने में लगे हैं।