UP ELECTION 2022

आज़म खां और अब्दुल हमीद के नाम पर बग़लें क्यों झांकते हैं अखिलेशवादी

आज़म खां और वीर अब्दुल हमीद के नाम पर बग़लें झांकने लगते हैं अखिलेशवादी। इतना ही नहीं आज़म खां और वीर अब्दुल हमीद पर सवाल होते ही भौएं सिकोड़ने लगते हैं। लगातार दुनिया और मीडिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश करते दिख रहे हैं अखिलेश वादी। 2022 चुनाव की तैयारी में लगे अखिलेश वादियों ने कल यानी शुक्रवार को बरेली के फ़तेहगंज पश्चिमी में सभा की। एम एल सी राजपाल कश्यप "आज़म खां और अब्दुल हमीद" पर मीडिया के सवालों को इधर करते दिखे साथ ही पार्टी के ज़िला अध्यक्ष मीडिया के सवालों से ना सिर्फ़ तिलमिला उठे बल्कि बीच में ही खड़े होकर बातचीत रोक दी। उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के चलते सभी दलों के दिलों में मुसलमानों - बेरोज़गारों - युवाओं - किसानों - दलितों - बेटियों का प्यार ओर चिन्ता उमड़ने लगी है। अगर बात करें समाजवादी पार्टी की तो ग़ुज़रे पांच साल के दौरान गहरी नीन्द सोती रही पार्टी को चुनाव की आहट के साथ ही जाग उठी। मामला चाहे हाथरस की मनीषा बालमीकि का हो बलरामपुर बलात्कार का। बात चाहे किसानों पर साल भर तक हुए जुल्म का हो या बेरोज़गारों के दमन का। समाजवादी पार्टी कहीं नज़र नहीं आई। यूपी या देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जानती है कि समाजवादी पार्टी को सरकार तक पहुंचाने का कारनामा सिर्फ़ और सिर्फ़ आज़म खां का ही था। लेकिन जब आज़म खां योगी की साजिशों का शिकार बनाये गये तब एक भी अखिलेशवादी आज़म खां के लिए खड़ा नहीं दिखा। सवाल यह है कि क्या पार्टी में आज़म खां के अलावा सब दूध के धुले हैं। क्या आज़म खां के अलावा किसी ने कोई गड़बड़ घोटाला नहीं किया ? योगी ने आज़म खां के ख़िलाफ़ जो खेल खेला वो कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। क्योंकि योगी ने तो मुस्लिमों को मिटाने का बीड़ा उठा रखा है लेकिन आज़म खां के कांधों पर सवार होकर सत्ता सुख पाने वाले मुलायम सिंह या अखिलेश को तो आज़म खां का अहसान मानना चाहिये। यहां सबसे ख़ास बात यह है कि योगी के निशाने पर सिर्फ़ आज़म ख़ा ही आए। सपा सरकार में ऐश करने वाला दूसरा कोई नाम योगी के निशान पर नहीं आ सका। इसकी वजह सब समझते हैं। बरेली के फ़तेहगंज पश्चिमी मे कल हुई सभा के दौरान अखिलेश वादियों ने ना सिर्फ़ स्वागत कर्ता को झिड़का गया बल्कि मीडिया के साथ भी दबंग रवैया अपनाते दिखे