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मास्क के नाम पर उगाही और दबंगई का लाईसेंस

सरकारी बीमारी यानी कोरोना ने ना सिर्फ़ पुलिस को दबंगई और गुलाम जनता से उगाही करने का लाईसेंस दे दिया है बल्कि दरगाहों के मुजाबिरों इन्तेज़ामियां - मन्दिर के प्रबन्धन - स्कूल प्रबन्धनों - सरकारी और प्राईवेट संस्थानों को दादागीरी करने का लाईसेंस भी दे दिया है। बिना मास्क पहने वर्दी वाले ग़ुलाम जनों से मास्क के नाम पर दबंगई करते दिख रहे हैं बल्कि जमकर उगाही भी करते मिलते हैं। स्कूलों से अदालतों तक के कारिन्दे खुद मास्क नहीं लगाते लेकिन गुलाम जनता को मास्क के बगैर प्रवेश नहीं देते। फिलहाल मास्क मास्क चिल्लाने वालों की कुछ तस्वीरें आपको दिखाते हैं। ये तस्वीरें हैं बम्बई की दरगाह *हाजी अली* की। दरगाह के गेट पर बैठा यह बुग्गा मास्क के नाम पर ज़ायरीनों के साथ खुली दबंगई करता रहता है। देखिये इसके मास्क की हालत। दूसरी तस्वीर दरगाह के मुजाबिर की है यह शख्स दिन भर लाउडस्पीकर पर मास्क मास्क चिल्लाता है लेकिन खुद मास्क नहीं पहने है।