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कैसे भूल जाऊं गुजरात आतंक पर कांग्रेस का जश्न मनाना : इमरान नियाज़ी

मैं कांग्रेस के ख़िलाफ़ क्यों हूं। मैं इमरान नियाज़ी। हमेशा से ही लोग मुझसे पूछते हैं कि कांग्रेस के ख़िलाफ़ क्यों हूं। मुसलमान होकर भी कांग्रेस को ना पसन्द करता हूं वगैराह वगैराह। इसलिए आज साफ़ करदूं कि मैं कांग्रेस के ख़िलाफ़ क्यों हूं। चाहे कोई कांग्रेस को सैक्यूलर माने या मुस्लिम हिमायती समझने की भूल करे। लेकिन कांग्रेस शुरू से ही मुसलमानों की आस्तीन में सांप की तरह पली हुई है। मौक़े मौक़े पर कांग्रेस ने मुसलमानों को डसा है लेकिन फिर भी मुसलमानों का ज़मीर नहीं जाग रहा मुसलमान लगातार कांग्रेस की दरी बिछाने में लगा है। अनपढ़ से पीएचडी तक कर चुके मुसलमान इतिहास के पन्नों को पलट कर नहीं देखते। ब्रिटिश रूल्स हटने के बाद कांग्रेस ने ही मुसलमान को प्रधान मंत्री वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री ना बनाये जाने का बिल पास किया था जिसके नतीजे में देश का बंटवारा हुआ। जवाहर लाल नेहरु ने फौज से निज़ाम हैदराबाद के हज़ारों लोगों को गोलियों से भुनवाया। चलिये मान लिया कि कांग्रेस की ये करतूतें 75 साल पुरानी है लेकिन जबरन नस्बन्दियां कराया जाना तो याद होना चाहिये। इसको भी छोड़िये। 1980 में युपी के मुरादाबाद में ईद के दिन ईद की नमाज़ अदा कर रहे मुसलमानों पर पीएसी की गोलियों से भुनवाने की करतूत तो याद होगी ही या दुम हिलाने की आदत के चलते मुसलमान ये भी भूल गये। बाबरी मस्जिद का ताला खोलना मूर्तियां रखवाना पूजा शुरु कराने की कांग्रेस की हरकत भूल गये। तत्कालीन कांग्रेसी प्रधान मंत्री नरसिम्हाराव की साजिश के चलते बाबरी मस्जिद शहीद करादी गई। क्या बाबरी भी भूल गये मुसलमान। मान लिया कि दरी बिछाने की आदत के हाथों मजबूर होकर मुसलमान बाबरी मस्जिद को भी भूल गये लेकिन गुजरात आतंक तो याद होना चाहिये किस तरह गुजरात में सरकारी और गैर सरकारी आतंकियों ने गोधरा में साजिश करके बेकसूर मुसलमानों का क़त्लेआम किया आबरु ज़नी की। गुजरात आतंक के लगभग ढाई साल बाद जब कांग्रेस केन्द्र की सत्ता पर क़ाबिज़ हुई तब सोनिया नामक रिमोट से चलने वाली मनमोहन सिंह सरकार ने सबसे पहले गुजरात आतंक के मास्टर माइण्ड को सम्मान और पुरुस्कार दिया। गुजरात के 35 सौ से ज्यादा मुसलमानों के क़त्लेआम पर खुश होकर मास्टर माइण्ड को सम्मानित करके भी कांग्रेस को पूरी खुशी नहीं मिली तो सोनिया गांधी नाम के रिमोट से चलने वाली कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार ने तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव की गठित "नानावटी आयोग" की रिपोर्ट पर क़ानूनी कार्यवाही करने की बजाये हमेशा के लिए दफ़ना दिया। कांग्रेस की इस करतूत का ख़मियाज़ा ना सिर्फ़ मुसलमान भुगत रहे हैं बल्कि पूरा देश भुगत रहा है। हो सकता है कि मुसलमानों के ज़मीर को जगाने की मेरी इस कोशिश से कांग्रेसियों को तकलीफ़ हो लेकिन क़ौम की आंखें खोलने के लिए ये सब ज़रुरी है। ग़ौर कीजिये फिर फैसला कीजिये।